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प्रयागराज माघ मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, संगम में लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ संगम घाटों पर देखी गई। भक्तों ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई और प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की। माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। संगम स्नान के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन का आयोजन भी हो रहा है।
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प्रयागराज माघ मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, संगम में लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज में माघ मेले का उत्सव

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के तीसरे दिन सोमवार को संगम घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। देशभर से आए भक्तों ने त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान करने के बाद गदगद होकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक श्रद्धालु ने कहा, “हम हैदराबाद से आए हैं। पहले महाकुंभ में भी आए थे और अब माघ मेले में स्नान किया है। स्नान के बाद हम काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे और फिर अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करेंगे।” उन्होंने योगी सरकार के इंतजामों की सराहना की और कहा, “हर-हर गंगे।”


भक्तों ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। एक भक्त ने कहा, “सरकार ने भीड़ को बहुत अच्छे से संभाला है। ट्रैफिक और पार्किंग की व्यवस्थाएं सराहनीय हैं। मैं सभी को यहां आने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूंगा, क्योंकि कोई दिक्कत नहीं होगी।”


एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “माघ मेला अपने आप में खास है। यहां आकर बहुत अच्छा लगता है। पिछले साल भी प्रशासन ने अच्छे इंतजाम किए थे और इस साल भी वही स्थिति है। पुलिस हर समय मौजूद है और श्रद्धालुओं की मदद के लिए तत्पर है। युवाओं में आस्था की भावना बहुत अधिक है। कुल मिलाकर, व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं और साफ-सुथरे चेंजिंग रूम भी उपलब्ध हैं।”


माघ मेला 2026 की शुरुआत 3 जनवरी से हुई है और यह 15 फरवरी तक चलेगा। पहले दिन लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया था और अब भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता, ट्रैफिक और पार्किंग के पुख्ता इंतजाम किए हैं। ठंडी हवाओं और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। माघ मेला आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। यहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या है। संगम घाटों पर स्नान के साथ भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचन भी हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि संगम स्नान से पापों का नाश होता है और मन को शांति मिलती है।