प्रयागराज में शंकराचार्य पर यौन शोषण के आरोप: क्या है पूरा मामला?
प्रयागराज में गंभीर कानूनी संकट
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक गंभीर कानूनी संकट में फंस गए हैं। एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने उनके और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। आश्रम में रहने वाले नाबालिग बच्चों के साथ कथित दुव्र्यवहार ने पूरे देश में धार्मिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है।
अदालत का महत्वपूर्ण आदेश
एडीजे पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अदालत ने झूंसी थाना पुलिस को निर्देश दिया है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। इस आदेश के बाद पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला एक प्रभावशाली धार्मिक गुरु से जुड़ा है। यह न्यायिक आदेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका
इस विवाद की शुरुआत शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर की गई याचिका से हुई। उन्होंने 28 जनवरी को अदालत में कहा कि आश्रम में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण हो रहा है। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में एक संदिग्ध सीडी भी अदालत में पेश की है। उनका आरोप है कि विद्या मठ में बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
नाबालिगों के बयान
कानूनी प्रक्रिया के तहत 13 फरवरी को इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। यौन शोषण का आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों के बयान अदालत में गोपनीयता के साथ दर्ज किए गए। कोर्ट ने इन बयानों को गंभीरता से लिया और पुलिस द्वारा पेश की गई प्रारंभिक रिपोर्ट का भी अध्ययन किया। सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने अपना फैसला सुरक्षित रखा, जो अब आदेश के रूप में सामने आया है।
पीड़ित बच्चों के लिए न्याय की पहली जीत
आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत के आदेश पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे पीड़ित बच्चों के लिए न्याय की पहली जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य मासूमों के साथ हो रहे अन्याय को रोकना है। उन्होंने प्रयागराज से वाराणसी के विद्या मठ तक एक विशाल पैदल 'सनातन यात्रा' निकालने की घोषणा की है, जिसमें वे आम भक्तों के सामने उन तथ्यों को रखेंगे जो अब तक छिपे हुए थे।
आश्रम पर संकट के बादल
शंकराचार्य जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटना है। जांच टीम विद्या मठ और अन्य संबंधित आश्रमों में साक्ष्य एकत्रित करने के लिए छापेमारी कर सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की संभावित गिरफ्तारी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाज की नजर अब झूंसी पुलिस की कार्यप्रणाली और भविष्य की कानूनी कार्यवाहियों पर है।
