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फरीदाबाद में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नए संयंत्रों की स्थापना

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फरीदाबाद में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए तीन नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना की घोषणा की है। ये संयंत्र स्थानीय उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक उपचार करेंगे, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। जानें इन संयंत्रों की विशेषताएँ और उनके प्रभाव के बारे में।
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फरीदाबाद में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नए संयंत्रों की स्थापना

मुख्यमंत्री ने दी फरीदाबाद को नई सौगात

फरीदाबाद . हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने औद्योगिक शहर फरीदाबाद के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। औद्योगिक अपशिष्ट के प्रबंधन की समस्या को हल करने के लिए, सरकार ने तीन नए साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (CETP) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य फरीदाबाद के बढ़ते उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना और पर्यावरण की सुरक्षा करना है।


हाई-टेक शोधन संयंत्रों की स्थापना के स्थान

इन इलाकों में लगेंगे हाई-टेक शोधन संयंत्र


हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) ने इन संयंत्रों के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। बादशाहपुर में 15 MLD क्षमता का संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जो सेक्टर-27A से लेकर सेक्टर-45 तक के उद्योगों के अपशिष्ट को साफ करेगा। सबसे बड़ा संयंत्र प्रतापगढ़ में 50 MLD क्षमता का होगा, जो सेक्टर-24, 25, 52A और सेक्टर-155 की औद्योगिक इकाइयों को कवर करेगा। इसके अलावा, मिर्जापुर में 25 MLD का संयंत्र सेक्टर-4, 5, 6, 71 और 74 के उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण होगा।


वित्तीय मॉडल को मिली मंजूरी

चीफ सेक्रेटरी ने दी वित्तीय मॉडल को हरी झंडी


मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इन 927 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के वित्तीय ढांचे को अंतिम रूप दिया गया। योजना के अनुसार, इस भारी खर्च का 50 प्रतिशत नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। शेष 50 प्रतिशत में से HSIIDC और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) 25-25 प्रतिशत का योगदान देंगे। इस साझा खर्च मॉडल से परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।


स्थानीय निवासियों और पर्यावरण पर प्रभाव

आम जनता और पर्यावरण पर क्या होगा असर?


फरीदाबाद में औद्योगिक कचरे का बेतरतीब बहाव स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और भूजल के लिए खतरा बना हुआ था। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि ये CETP संयंत्र जल प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ उद्योगों के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे। जब औद्योगिक पानी का वैज्ञानिक उपचार होगा, तो यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी की मात्रा कम होगी और शहर के रिहायशी क्षेत्रों में सीवरेज जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी।