फरीदाबाद में महिला निशानेबाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप: कोच निलंबित
फरीदाबाद में गंभीर यौन उत्पीड़न का मामला
फरीदाबाद से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक 17 वर्षीय महिला निशानेबाज ने अपने कोच अंकुश भारद्वाज पर गंभीर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
कोच को निलंबित किया गया
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोच को सभी कोचिंग दायित्वों से तुरंत निलंबित कर दिया है। पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है और जांच को तेज कर दिया है। पीड़िता लंबे समय से शूटिंग खेल में सक्रिय है और 2016 से दिल्ली की डॉक्टर करणी सिंह शूटिंग रेंज में नियमित रूप से अभ्यास कर रही है।
घटना का विवरण
यह घटना 16 दिसंबर 2025 को हुई, जब पीड़िता का राष्ट्रीय स्तर का मुकाबला सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुआ और लगभग सवा ग्यारह बजे समाप्त हुआ। मैच के बाद कोच ने उसे प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए रेंज में रुकने को कहा। दोपहर दो बजे तक इंतजार करने के बाद, कोच ने उसे फरीदाबाद के सूरजकुंड क्षेत्र में एक लग्जरी होटल की लॉबी में बुलाया।
कुछ समय बाद, कोच ने उसे लिफ्ट क्षेत्र में बुलाया और वहां से अपने कमरे में ले गए, जहां उन्होंने कथित तौर पर नोट्स लिखवाने का बहाना बनाया। जब पीड़िता जाने लगी, तो कोच ने उसके कंधों को दबाना शुरू कर दिया और कहा कि वह उसकी पीठ की हड्डियां ठीक कर देंगे। पीड़िता के विरोध करने पर, कोच ने उसे बिस्तर पर धकेलकर यौन उत्पीड़न किया।
धमकी और परिवार की प्रतिक्रिया
पीड़िता ने किसी तरह खुद को छुड़ाया और कोच को धक्का देकर बाहर निकली। आरोपी ने उसे धमकी दी कि अगर उसने यह बात किसी को बताई, तो उसका पूरा शूटिंग करियर बर्बाद कर देगा। घटना के बाद, पीड़िता अपने पिता के कार्यालय गई और फिर घर लौटी। इस बीच, कोच ने उसके माता-पिता से फोन पर शिकायत की कि वह उनकी बात नहीं मानती।
कई दिनों तक चुप रहने के बाद, पीड़िता ने अपनी मां को सब कुछ बता दिया। परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता के बयान पर कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया और होटल के सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य सबूत जुटाने शुरू कर दिए हैं। एनआरएआई ने भी जांच पूरी होने तक कोच को सभी जिम्मेदारियों से दूर रखने का निर्णय लिया है। यह मामला खेल जगत में एथलीटों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है।
