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फर्जी IAS की गिरफ्तारी पर सवाल: असली दस्तावेजों से खुलासा

मेरठ में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी, जिसे पुलिस ने फर्जी IAS बताया, ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल कौशिक ने खुद को असली IAS साबित करने के लिए पुख्ता दस्तावेज पेश किए हैं, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल।
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फर्जी IAS की गिरफ्तारी पर सवाल: असली दस्तावेजों से खुलासा

मेरठ में फर्जी IAS की गिरफ्तारी पर उठे सवाल

मेरठ: जिले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी, जिसे पुलिस ने 'फर्जी IAS' बताया, ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल कौशिक, जिसे पुलिस ने फर्जी अधिकारी बताकर गिरफ्तार किया था, ने अब खुद को असली IAS साबित करने के लिए पुख्ता दस्तावेज पेश किए हैं, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, और मामला अब और जटिल हो गया है।


पुलिस के दावों की हवा निकली: UPSC के सबूत सामने आए


12 मार्च को मेरठ पुलिस ने राहुल कौशिक को हिरासत में लिया था, यह कहते हुए कि वह फर्जी IAS बनकर अधिकारियों को गुमराह कर रहा था। पुलिस ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताया था, लेकिन राहुल ने मीडिया के सामने आकर पुलिस के दावों को खारिज कर दिया। उसने बताया कि उसने 2008 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास की थी और इंडियन पोस्टल सर्विस में 728वीं रैंक के साथ चयनित हुआ था। अपने दावों को साबित करने के लिए उसने गृह मंत्रालय का पहचान पत्र, ब्यूरो ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज एंड ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र, डाक विभाग का आई कार्ड और यूपीएससी परिणाम की पुरानी कटिंग भी दिखाई।


पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप


राहुल ने बताया कि 11 और 12 मार्च की रात, 10 से 12 पुलिसकर्मी अचानक उसके घर में घुस आए और बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे हिरासत में ले लिया। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसका फोन जब्त किया और दुर्व्यवहार किया। उसे बिना सुने ही थाने में बिठाए रखा गया। बाद में परिवार को सूचना मिलने पर उसे छोड़ा गया।


गिरफ्तारी के पीछे की असली कहानी


सूत्रों के अनुसार, राहुल की किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से फोन पर बहस हुई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इसके अलावा, राहुल पर 2017-18 में धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके चलते उसे निलंबित किया गया और 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वह इस फैसले के खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। अब वह पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस ने बिना उचित जांच के किसी व्यक्ति को फर्जी अधिकारी घोषित कर दिया?