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फालता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान: सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पश्चिम बंगाल के फालता विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मतदान के दौरान ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस बार मुख्य मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच है, जबकि टीएमसी के उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। जानें इस चुनावी प्रक्रिया के बारे में और क्या है उम्मीदवारों की स्थिति।
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फालता विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान: सुरक्षा के कड़े इंतजाम

फालता विधानसभा में पुनर्मतदान की प्रक्रिया

साउथ 24 परगना: पश्चिम बंगाल के फालता विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर मतदान का आयोजन किया जा रहा है। सुबह 9 बजे तक लगभग 20.47 प्रतिशत मतदान हुआ। निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं, और प्रत्येक मतदान केंद्र पर पहले से दोगुने सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। हर पोलिंग बूथ पर चार की जगह अब आठ जवान मौजूद हैं। कुल 285 मतदान केंद्रों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग जारी रहेगी।


पिछले मतदान, जो 29 अप्रैल को हुआ था, के दौरान कई बूथों से शिकायतें आई थीं कि ईवीएम में भाजपा के चुनाव चिन्ह वाले बटन पर टेप लगा दिया गया था। इसके अलावा, कुछ स्थानों पर वेब कैमरों की फुटेज में छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने क्षेत्र का दौरा किया, जिसमें लगभग 60 बूथों पर गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया।


भाजपा का फालता में अब तक का सफर

फालता सीट लंबे समय से सीपीआई(एम) का गढ़ रही है, लेकिन पिछले तीन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है। 2011 के बाद से टीएमसी ने इस सीट पर लगातार जीत हासिल की है। भाजपा ने जिले की अन्य सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन फालता सीट अब तक उसके लिए चुनौती बनी हुई है। साउथ 24 परगना जिले में कुल 31 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें भाजपा ने 9 सीटें जीती हैं, जबकि टीएमसी ने 21 सीटों पर अपना वर्चस्व बनाए रखा है।


उम्मीदवारों की स्थिति

इस बार फालता सीट पर कुल छह उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच है। हालांकि, मतदान से दो दिन पहले टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। फिर भी, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, उनका नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह ईवीएम से नहीं हटाया जा सकता। नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त हो चुकी है, इसलिए वे अभी भी आधिकारिक रूप से टीएमसी के उम्मीदवार माने जाएंगे।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि जहांगीर खान ने मौखिक रूप से चुनाव आयोग को आवेदन दिया है और आयोग ने इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, तो अधिक वोट मिलने की स्थिति में वे जीत का दावा कर सकते हैं। वहीं, यदि लिखित आवेदन दिया गया है, तो टीएमसी के चिन्ह पर पड़े वोटों के संबंध में अंतिम निर्णय आयोग ही करेगा।