Newzfatafatlogo

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026: पूजा विधि और महत्व

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 का विशेष महत्व है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं। जानें इस दिन की चतुर्थी तिथि, शुभ मुहूर्त, और पूजा विधि के बारे में। साथ ही, जानें क्यों चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है। इस पावन अवसर पर शुक्ल और रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जो पूजा के फल को बढ़ाता है।
 | 
फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026: पूजा विधि और महत्व

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 का महत्व

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष फाल्गुन विनायक चतुर्थी का मुख्य व्रत 21 फरवरी 2026 को उदयातिथि के अनुसार मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी संकट समाप्त होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।


चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त


पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 20 फरवरी 2026 को दोपहर 02:38 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 21 फरवरी 2026 को दोपहर 01:00 बजे होगा। व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:27 से लेकर दोपहर 01:00 बजे तक रहेगा।


शुक्ल और रवि योग का संयोग

शुक्ल और रवि योग का संयोग


इस बार विनायक चतुर्थी के अवसर पर शुक्ल योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष के अनुसार, ये दोनों योग पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देते हैं। यह मंगलकारी योग शाम से लेकर पूरी रात तक प्रभावी रहेगा।


चंद्र दर्शन का वर्जन

चंद्र दर्शन रहता है वर्जित


विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर कलंक लगता है। इसलिए व्रती को रात के समय चंद्रमा की ओर देखने से बचना चाहिए।


विनायक चतुर्थी का महत्व

विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व


धार्मिक ग्रंथों में विनायक चतुर्थी को संकटों को दूर करने वाली तिथि माना गया है। फाल्गुन मास की यह चतुर्थी नई ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन व्रत रखने से साधक को ज्ञान, बुद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मानसिक शांति या करियर में बाधाओं का सामना कर रहे लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।


गणपति बप्पा की पूजा विधि

गणपति बप्पा की पूजा विधि


सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा को लाल कपड़े पर स्थापित करें और उनका गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। बप्पा को सिंदूर, अक्षत और 21 गांठें दूर्वा अर्पित करें। अंत में मोदक या लड्डू का भोग लगाकर गणेश चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें।