फ्रांस के राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी टैरिफ धमकियों की निंदा की
मैक्रों की कड़ी प्रतिक्रिया
पेरिस: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के संदर्भ में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ की धमकियों पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये धमकियां अस्वीकार्य हैं और यदि ये लागू होती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट होकर इसका जवाब देंगे।
संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा
मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "फ्रांस यूरोप और अन्य क्षेत्रों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। यही हमारे निर्णयों का आधार है। यही संयुक्त राष्ट्र और उसके चार्टर के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का आधार है। हम यूक्रेन का समर्थन करते रहेंगे और इसके लिए एक मजबूत गठबंधन बनाया है।"
धमकियों का कोई असर नहीं
उन्होंने आगे कहा, "कोई भी धमकी या दबाव हमें प्रभावित नहीं करेगा, चाहे वह यूक्रेन में हो, ग्रीनलैंड में या कहीं और।"
टैरिफ की धमकियों का विरोध
मैक्रों ने अपने पोस्ट में लिखा, "टैरिफ की धमकियां अस्वीकार्य हैं और इस संदर्भ में उनकी कोई जगह नहीं है। यदि इन्हें लागू किया गया, तो यूरोपीय देश एकजुट होकर जवाब देंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यूरोपीय संप्रभुता बनी रहे।"
ट्रंप की घोषणा का संदर्भ
यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामानों पर ग्रीनलैंड को लेकर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा और जून में इसे 25 प्रतिशत कर देगा।
ग्रीनलैंड का महत्व
ग्रीनलैंड, जो दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, डेनमार्क साम्राज्य का एक स्व-शासित क्षेत्र है, जहां रक्षा और विदेश नीति का नियंत्रण कोपेनहेगन के पास है। अमेरिका का इस द्वीप पर एक सैन्य अड्डा भी है। डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में सत्ता में लौटने के बाद कई बार ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जताई है।
