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बंगाल के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सियासी विवाद

बंगाल में मनोज कुमार अग्रवाल को मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त करने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। टीएमसी नेताओं ने इसे बीजेपी को चुनाव में मदद करने का इनाम बताया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि मनोज कुमार अग्रवाल का प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए योग्य बनाता है। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है और मनोज कुमार अग्रवाल कौन हैं।
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बंगाल के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति पर सियासी विवाद

मुख्य सचिव की नियुक्ति पर हंगामा


बंगाल के सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त करने के बाद राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। सोमवार को, 1990 बैच के IAS अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को इस पद पर नियुक्त किया गया। पिछले एक वर्ष से, वह बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत थे, और उनके अधीन SIR का कार्य पूरा हुआ। टीएमसी के नेताओं को यह नियुक्ति अस्वीकार्य लग रही है, और उनका कहना है कि यह बीजेपी को चुनाव में मदद करने के लिए एक इनाम है। इस पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार नियमों के अनुसार कार्य कर रही है।


सुवेंदु अधिकारी का बयान

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मनोज कुमार अग्रवाल राज्य के सबसे वरिष्ठ सिविल सेवक हैं, जिनके पास 36 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि उनकी वरिष्ठता के आधार पर उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया है, और विपक्ष के दबाव में सरकार कोई निर्णय नहीं बदलेगी।


मनोज कुमार अग्रवाल का परिचय

मनोज कुमार अग्रवाल, जो अब पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव बने हैं, ने IIT कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। बीजेपी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि उनकी नियुक्ति से राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जनहित में प्रशासनिक निर्णय लिए जा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि मनोज कुमार अग्रवाल अप्रैल 2025 से पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा, उनके पास गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी है।