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बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी: क्या है असामान्य हलचल का कारण?

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बांग्लादेशी परिवारों की वापसी की असामान्य हलचल देखी जा रही है। घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की चर्चाओं ने कई परिवारों को बंगाल छोड़ने पर मजबूर कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक साल में यह दूसरी बार है जब बड़ी संख्या में लोग सीमा की ओर लौटते हुए देखे जा रहे हैं। जानिए इस स्थिति के पीछे के कारण और स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रियाएँ।
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बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों की वापसी: क्या है असामान्य हलचल का कारण?

कोलकाता में सीमा पर बढ़ती गतिविधियाँ


कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर में हाकिमपुर चेकपोस्ट पर पिछले दो दिनों से कुछ असामान्य गतिविधियाँ देखी जा रही हैं। सीमा की ओर बढ़ते हुए लोगों के चेहरों पर चिंता और बेचैनी साफ नजर आ रही है। महिलाओं के हाथों में जल्दी में बांधे गए छोटे बैग और बच्चों की आंखों में अनिश्चितता इस स्थिति को और गंभीर बना रही है।


बांग्लादेशी परिवारों की वापसी का कारण

सूत्रों के अनुसार, राज्य में घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावनाओं के चलते कई बांग्लादेशी परिवार बंगाल छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। विशेष रूप से होल्डिंग सेंटर बनाने की खबरों ने अवैध रूप से रह रहे लोगों में भय का माहौल उत्पन्न कर दिया है।


होल्डिंग सेंटर के डर से बढ़ी घबराहट

जानकारी के अनुसार, जिन लोगों की पहचान अवैध घुसपैठियों के रूप में की जा रही है, उन्हें सीमा पार भेजे जाने की आशंका है। इसी डर के कारण कई परिवार रातोंरात सीमा की ओर लौटते हुए देखे जा रहे हैं।


इससे पहले भी एसआईआर और अन्य राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी।


वर्षों से रह रहे परिवार लौट रहे हैं

सीमा की ओर लौटने वाले लोगों में ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जो कई वर्षों से बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में निवास कर रहे थे।


कोलकाता, बारासात, दमदम और हावड़ा जैसे शहरों में कई लोग रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू सहायिका और छोटे कारखानों में काम कर रहे थे। समय के साथ, उन्होंने इन शहरों में अपनी एक छोटी सी दुनिया बसा ली थी।


देर रात सीमा की ओर बढ़ते लोग

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय निवासियों के अनुसार, लोग देर रात से सुबह तक छोटे-छोटे समूहों में सीमा की ओर बढ़ रहे हैं।


28 वर्षीय नसीम मोल्ला ने कहा, "पहले लगा कि सिर्फ कागज चेक होंगे, लेकिन अब फैक्ट्री मालिक भी कह रहा है कि कुछ दिन गायब हो जाओ। हम गरीब लोग हैं, जेल नहीं जाना चाहते।"


नसीम के अनुसार, वह कोलकाता के एक चमड़ा कारखाने में काम करता था।


स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

सीमा से लगे गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले एक साल में यह दूसरी बार है जब अचानक बड़ी संख्या में लोग सीमा की ओर लौटते हुए देखे जा रहे हैं।


42 वर्षीय अब्दुल करीम ने कहा, "दस साल पहले मजदूरी करने आया था। यहां आधार, वोटर और राशन कार्ड भी बन गया, वोट भी दिए थे, लेकिन अब माहौल बदल गया है।"


बढ़ती चर्चाओं से बना डर का माहौल

राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई की चर्चाओं ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।


इस कारण अवैध रूप से रह रहे लोगों के बीच गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने का डर लगातार बढ़ता जा रहा है।