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बंगाल में बीजेपी का 'ऑपरेशन क्लीनअप': अवैध मदरसों पर कार्रवाई

बंगाल में बीजेपी ने अवैध मदरसों के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीनअप' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य बिना सरकारी मान्यता के चल रहे संस्थानों को बंद करना है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। इसके साथ ही, सार्वजनिक नमाज पर प्रतिबंध लगाने की योजना भी बनाई गई है। बीजेपी विधायक रितेश तिवारी के विवादास्पद बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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बंगाल में बीजेपी का 'ऑपरेशन क्लीनअप': अवैध मदरसों पर कार्रवाई

बंगाल में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई


बंगाल में बीजेपी ने सत्ता में आते ही सक्रियता दिखाई है। राज्य सरकार ने अवैध और गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीनअप' शुरू करने का निर्णय लिया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी अवैध गतिविधि को सहन नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य उन मदरसों की पहचान करना है जो बिना सरकारी मान्यता के चल रहे हैं और उन्हें बंद करना है। बीजेपी विधायक सजल घोष ने कहा कि यह उनकी पार्टी के एजेंडे का एक हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का उद्देश्य अवैध संस्थानों को बंद करना है, न कि मदरसों के खिलाफ होना।


सार्वजनिक नमाज पर प्रतिबंध

बीजेपी विधायक अर्जुन सिंह ने सड़कों पर या खुले में नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में इस पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सड़कों पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और लोगों को मस्जिद में जाकर नमाज अदा करने के लिए कहा गया है।


सिंह ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में रेड रोड पर सार्वजनिक नमाज के कारण सेना के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित होते थे। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है, और बड़े धार्मिक जमावड़ों से प्रशासन को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


वोट देने वालों के लिए काम करने का बयान

काशीपुर-बेलगाछिया निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी विधायक रितेश तिवारी का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वह केवल उन लोगों के लिए काम करेंगे जिन्होंने उन्हें वोट दिया है। जब मीडिया ने उनके बयान पर सवाल उठाया, तो उन्होंने अपनी बात पर कायम रहने की बात कही। तिवारी ने 13 मई को कहा था कि वह मुसलमानों के लिए काम नहीं करेंगे क्योंकि चुनावों में किसी ने उन्हें वोट नहीं दिया।


सत्ता पक्ष के ऐसे बयानों से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, जबकि बीजेपी इसे कानून व्यवस्था और अवैध संस्थानों पर कार्रवाई का मामला बता रही है।