बंगाल में वंदे मातरम गायन पर हुमायूं कबीर का विवादित बयान
हुमायूं कबीर का नया चैलेंज
गाय की कुर्बानी पर विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद, हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक और चुनौती दी है। एजेयूपी के अध्यक्ष ने वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य बनाने के सरकार के निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा, चाहे सरकार जो भी करे। कबीर ने सवाल उठाया कि सरकार को मदरसों में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया है।
मदरसा शिक्षा निदेशालय का आदेश
हाल ही में, पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा में वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। निदेशालय ने कहा कि कक्षाएं शुरू करने से पहले वंदे मातरम का गायन आवश्यक होगा। एक सप्ताह पहले, राज्य सरकार ने सभी स्कूलों को भी इसी तरह का आदेश दिया था, जिसमें सुबह की प्रार्थना सभा में वंदे मातरम के छह छंदों का गायन अनिवार्य किया गया।
धार्मिक आधार पर सवाल उठाते हुए
कोलकाता की खिलाफत कमेटी के प्रमुख मोहम्मद अशरफ अली कासमी ने भी इस सरकारी आदेश पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को धर्म के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। कासमी ने कहा कि वे वंदे मातरम के गायन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे मुसलमानों पर थोपना उचित नहीं है, क्योंकि इसके कुछ अंश उनके धर्म के खिलाफ हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार से इस आदेश को वापस लेने की अपील की है और कहा कि मुसलमान केवल अल्लाह की इबादत करते हैं।
