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बच्चों की डिजिटल सुरक्षा: स्मार्टफोन सेटिंग्स में करें ये बदलाव

डिजिटल युग में स्मार्टफोन बच्चों की पढ़ाई का अहम हिस्सा बन गए हैं, लेकिन इसके साथ ही यह माता-पिता के लिए चिंता का विषय भी हैं। हाल ही में अमेरिका में एक बच्चे की आत्महत्या की घटना ने डिजिटल सुरक्षा के मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए स्मार्टफोन सेटिंग्स में बदलाव कर सकते हैं। जानें चैटजीपीटी, यूट्यूब, और इंस्टाग्राम पर पेरेंटल कंट्रोल कैसे लागू करें और थर्ड-पार्टी ऐप्स का उपयोग करके अतिरिक्त सुरक्षा कैसे प्राप्त करें।
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बच्चों की डिजिटल सुरक्षा: स्मार्टफोन सेटिंग्स में करें ये बदलाव

नई दिल्ली में डिजिटल सुरक्षा की चुनौती

नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन बच्चों की शिक्षा और जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं, लेकिन यह माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती भी प्रस्तुत करते हैं। ऑनलाइन कक्षाओं और प्रोजेक्ट्स के माध्यम से बच्चे कब इंटरनेट की खतरनाक दुनिया में प्रवेश कर जाएं, यह चिंता हर अभिभावक को सताती है। हाल ही में एक सर्वेक्षण में पता चला है कि भारत में 73 प्रतिशत लोग एआई का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें जेन-जी (Gen-Z) की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत है। हालांकि, इस तकनीक के साथ 'डीपफेक', 'फेक न्यूज' और एआई चैटबॉट्स से जुड़े गंभीर खतरे भी सामने आए हैं।


अमेरिका में एआई के खतरे

अमेरिका की घटना और एआई के खतरे

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। हाल ही में अमेरिका में एक 14 वर्षीय बच्चे द्वारा एआई चैटबॉट से बातचीत के बाद आत्महत्या करने की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। इसके अलावा, 'ग्रोक' जैसे प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय है। ऐसे में माता-पिता को डिजिटल निगरानी के बजाय स्मार्ट मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। 'Watcher' जैसे ऐप्स इस दिशा में मदद कर सकते हैं, जो अभिभावकों को एक 'वर्चुअल आंख' प्रदान करते हैं। इससे वे बच्चे की लाइव लोकेशन, नोटिफिकेशन और ऐप पर बिताए गए समय को देख सकते हैं।


चैटजीपीटी और जेमिनी पर नियंत्रण

चैटजीपीटी और जेमिनी पर ऐसे लगाएं लगाम

बच्चे स्कूल के काम के लिए चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए पेरेंटल कंट्रोल बेहद आवश्यक है। चैटजीपीटी पर आप सेटिंग्स में जाकर 'फैमिली अकाउंट' बना सकते हैं और बच्चे की चैट हिस्ट्री व लिमिट निर्धारित कर सकते हैं। वहीं, गूगल जेमिनी के लिए गूगल का 'फैमिली लिंक' सिस्टम उपयोगी है। 'Family Link' ऐप डाउनलोड करके आप बच्चे के जीमेल को लिंक कर सकते हैं और यह नियंत्रित कर सकते हैं कि उसे एआई से क्या उत्तर मिल रहे हैं।


सोशल मीडिया पर सुरक्षा उपाय

यूट्यूब और इंस्टाग्राम के लिए सख्त सेटिंग्स जरूरी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जोखिम सबसे अधिक होता है। यदि बच्चा यूट्यूब देखता है, तो ऐप की सेटिंग्स में 'फैमिली सेंटर' के जरिए उसके लिए एक अलग प्रोफाइल बनाना अनिवार्य है। यदि बच्चे के पास अपना डिवाइस है, तो गूगल फैमिली लिंक के जरिए सर्च और रिकमेंडेशन को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सकता है। इसी तरह इंस्टाग्राम पर 'सुपरविजन फॉर टीन्स' मोड एक बेहतरीन सुरक्षा कवच है। इसे प्रोफाइल मेन्यू से सक्रिय करके आप यह तय कर सकते हैं कि बच्चा किस प्रकार के एआई कैरेक्टर से बात करे और उसकी फीड में आपत्तिजनक कीवर्ड्स वाले पोस्ट न आएं।


थर्ड-पार्टी ऐप्स से सुरक्षा में वृद्धि

थर्ड-पार्टी ऐप्स देंगे सुरक्षा का अतिरिक्त चक्र

कई बार फोन की इन-बिल्ट सेटिंग्स पर्याप्त नहीं होतीं, ऐसे में थर्ड-पार्टी ऐप्स अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। 'Net Nanny' जैसे ऐप्स वेबसाइट और सोशल मीडिया कंटेंट को फिल्टर करने में सक्षम हैं, जबकि 'Canopy' ऐप एआई की मदद से फोटो और टेक्स्ट में छिपे अश्लील कंटेंट को पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर देता है। इसके अलावा, बच्चे की ब्राउजिंग हिस्ट्री और स्क्रीन टाइम का पूरा लेखा-जोखा रखने के लिए 'Qustodio' एक बेहतर विकल्प है। ये ऐप्स बैकग्राउंड में काम करते हुए संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट सीधे माता-पिता को भेजते हैं।