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बच्चों में स्मार्टफोन की लत: अभिभावकों की अनदेखी का खामियाजा

स्मार्टफोन की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। अभिभावक अक्सर अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान नहीं देते, जिससे बच्चे एक अलग दुनिया में जीने लगते हैं। हाल ही में गाजियाबाद में हुई एक घटना ने इस समस्या को उजागर किया है, जहां तीन लड़कियों ने आत्महत्या कर ली। इस लेख में जानें कि कैसे अभिभावकों की अनदेखी और बच्चों की डिजिटल आदतें खतरनाक हो सकती हैं।
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बच्चों में स्मार्टफोन की लत: अभिभावकों की अनदेखी का खामियाजा

स्मार्टफोन की लत का बढ़ता खतरा

स्मार्टफोन की लत: हर माता-पिता के लिए उनके बच्चे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और वे उन्हें हर संभव खुशी देना चाहते हैं। लेकिन, बच्चों की इच्छाओं को पूरा करते-करते कई बार अभिभावक यह भूल जाते हैं कि उन्हें अपने बच्चों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना और सही-गलत का भेद सिखाना भी आवश्यक है। इसका एक बड़ा उदाहरण है- मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग।

वर्तमान में, अभिभावक बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की कोशिश में उन समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं जो उनके बच्चों के लिए गंभीर बनती जा रही हैं। अक्सर, जब बच्चे मोबाइल फोन की मांग करते हैं, तो उनकी जरूरतों को समझे बिना ही उन्हें फोन दे दिया जाता है। बच्चों को मोबाइल की लत तब लगनी शुरू होती है जब वे बोलना और चलना सीखते हैं। घर पर, मांएं बच्चों को फोन और टीवी के सामने बैठा देती हैं और अपने अन्य कामों में व्यस्त हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उन्हें बाहर खेलने के बजाय फोन पर गेम्स खेलना और टीवी देखना अधिक आकर्षक लगने लगता है।

इसके बाद, बच्चे वयस्क होने से पहले ही अपने व्यक्तिगत मोबाइल फोन की मांग करने लगते हैं। यहीं से खतरे की घंटी बजने लगती है। हालांकि, इसमें बच्चे की कोई गलती नहीं होती, क्योंकि इस उम्र तक आते-आते वे स्मार्टफोन और टीवी पर पूरी तरह निर्भर हो चुके होते हैं। अभिभावक सोचते हैं कि बच्चे को स्मार्टफोन देने से कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन इसके बाद वे अपने कामों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि यह जानने की कोशिश नहीं करते कि बच्चा पूरे दिन अपने फोन पर क्या कर रहा है। क्या वह डिप्रेशन का शिकार तो नहीं हो रहा? इसका परिणाम यह होता है कि बच्चे वास्तविकता से दूर होकर एक अलग दुनिया में जीने लगते हैं। गाजियाबाद की हालिया घटना इसका एक उदाहरण है, जहां तीन लड़कियों ने एक साथ नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पीड़ित परिवार ने इस घटना के लिए एक कोरियन गेम की लत को जिम्मेदार ठहराया है।

जांच में यह सामने आया है कि तीनों नाबालिग बहनों की मौत केवल ऑनलाइन गेम के कारण नहीं हुई, बल्कि यह घटना मोबाइल के बंद होने, डिजिटल दुनिया से कटने और कोरियन संस्कृति की गहरी लत से उत्पन्न मानसिक दबाव का परिणाम हो सकती है। पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में किसी भी प्रकार के कोरियन लव गेम या ऑनलाइन सुसाइड चैलेंज का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न ही मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में और न ही डायरी के पन्नों में किसी ऐसे गेम या टास्क का जिक्र है जो सीधे आत्महत्या के लिए उकसाता हो।

घटनास्थल से पुलिस को 8 पन्नों की एक डायरी मिली है, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि तीनों बच्चियां कोरियन संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित थीं और उससे अलग रहना उनके लिए असहनीय हो गया था। डायरी में कोरियन संस्कृति, K-POP, कोरियन म्यूजिक, कोरियन मूवीज, कोरियन शॉर्ट फिल्म्स, कोरियन शोज और कोरियन सीरीज का बार-बार उल्लेख है। एक स्थान पर अंग्रेजी में लिखा गया है- WE LOVE KOREAN CULTURE...। यह स्पष्ट है कि अभिभावकों ने अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन, गाजियाबाद की यह घटना पहली नहीं है।

पिछले कई वर्षों में ब्लू वेल, पबजी, मोमो चैलेंज जैसे कई ऑनलाइन गेम्स ने खुशहाल परिवारों को बर्बाद किया है। लेकिन, पीड़ितों ने हर बार यही कहा कि उन्हें अपने बच्चे की इन आदतों के बारे में जानकारी नहीं थी। सच्चाई यह है कि शायद इन परिवारों ने कभी अपने बच्चों की दिनचर्या के बारे में जानने की कोशिश नहीं की और न ही यह जानना चाहा कि उनका बच्चा मोबाइल फोन का कैसे उपयोग कर रहा है।