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बजट सत्र में केंद्रीय मंत्री का विपक्ष पर तीखा हमला

नई दिल्ली में बजट सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने लोकतंत्र को एक पवित्र मंदिर बताते हुए आलोचना की आवश्यकता पर जोर दिया। चौहान ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने विपक्ष की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे राज्य सरकारों ने बजट में प्रावधान किए हैं, जबकि केंद्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। इस बहस में उन्होंने सार्थक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया।
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बजट सत्र में केंद्रीय मंत्री का विपक्ष पर तीखा हमला

नई दिल्ली में बजट सत्र की चर्चा


नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यसभा में बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है, जो 2 अप्रैल को समाप्त होगा। मंगलवार को सदन में कार्यवाही जारी रही। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।' उन्होंने कहा कि आलोचना का स्वागत है, लेकिन यह केवल आलोचना के लिए नहीं होनी चाहिए।


केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि लोकतंत्र केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र मंदिर है। मैं बार-बार इस पवित्र मंदिर के सामने शीश झुकाता हूं। यदि इस मंदिर की कोई मूर्ति है, तो वह हमारी जनता है, और यदि इसके प्राण हैं, तो वह सार्थक बहस है। इसलिए मैं इस बहस का दिल से स्वागत करता हूं।


विपक्ष पर तीखा प्रहार

विपक्ष पर साधा निशाना


शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'दरिद्र ही नारायण है, जनता ही जनार्दन है।' यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का कथन है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल जी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने कहा था कि एक देश में दो निशान, दो विधान, और दो प्रधान नहीं चलेंगे। नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस संकल्प को पूरा किया।


केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले यह 'नरेगा' था, लेकिन जब वोटों की फसल काटने का समय आया, तो यह 'मनरेगा' में बदल गया। आपको गरीबों और मजदूरों से कुछ नहीं लेना था, बल्कि अपने वोटों से लेना था।




बजट में प्रावधानों की चर्चा

'बजट में प्रावधान कर दिया है'


केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों ने भी अपने बजट में प्रावधान कर दिए हैं। आप कहते थे कि राज्यों के पास पैसा कहां से आएगा। भारत की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। केंद्र का बजट भी बढ़ रहा है, और राज्यों का भी। केंद्रीय करों में राज्यों को उनका हिस्सा दिया जा रहा है। झारखंड में हमारी सरकार नहीं है, फिर भी बजट में प्रावधान किया गया है। केरल में भी ऐसा ही हुआ है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी आवश्यक प्रावधान किए गए हैं।