बधवाना माइनर: किसानों के लिए बनी मुसीबत, मरम्मत की मांग

बधवाना माइनर की स्थिति
Charkhi Dadri Badhwana Minor इमलोटा (चरखी दादरी): किसानों की मदद और खेतों में सिंचाई के लिए लगभग 50 साल पहले स्थापित बधवाना माइनर अब किसानों के लिए समस्या बन गई है।
खराब निर्माण सामग्री का असर
15 साल पहले इस माइनर को पक्का किया गया था, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उस समय घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था। माइनर का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा टूट चुका है, जिससे विभाग के करोड़ों रुपये बर्बाद हो चुके हैं। इसके कारण किसानों की फसलें बर्बाद होने के कगार पर हैं।
समस्या का समाधान नहीं
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय में फाइल भेजी गई है। बधवाना माइनर से जुड़े गांवों के लोगों ने कई बार विभाग को लिखित में सूचित किया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। 2009-10 में माइनर की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।
माइनर का इतिहास
50 साल पहले बनी थी माइनर
बधवाना माइनर का निर्माण सिंचाई विभाग ने लगभग 50 साल पहले किया था, ताकि क्षेत्र के लोगों को खेती और पीने के पानी की सुविधा मिल सके। इसके बाद से आसपास के गांवों में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई थी। लेकिन अब माइनर की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि न तो ईंटें बची हैं और न ही सीमेंट का कोई निशान।
फसल बर्बादी का खतरा
माइनर टूटने से हो सकती फसल बर्बाद: ग्रामीण
ग्रामीणों जैसे जयवीर, सज्जन, कुलदीप, अजय, और बलवान का कहना है कि लगातार बारिश के कारण उनकी ज्वार, बाजरा, कपास, और मूंग की फसलें जलभराव के कारण बर्बाद हो चुकी हैं। अगर माइनर का पानी खेतों में घुसा, तो आसपास के गांवों में भी जलभराव हो जाएगा।
नए निर्माण की योजना
विंडो सिस्टम तकनीक से होगा निर्माण
सिंचाई विभाग के एसडीओ हरबीर सिंह ने बताया कि एनआईटी कुरुक्षेत्र द्वारा माइनर का नया डिजाइन तैयार किया गया है। इसे विंडो सिस्टम तकनीक से फिर से बनाया जाएगा। विभाग ने कागजी कार्रवाई पूरी कर फाइल को मुख्यालय भेज दिया है।