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बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या: जमात-ए-इस्लामी पर गंभीर आरोप

बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचाने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया गया है। हादी की बढ़ती लोकप्रियता ने संगठन के भीतर असंतोष पैदा किया, जिसके चलते उनकी हत्या की साजिश रची गई। यह मामला अब बांग्लादेश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जानें इस हत्या के पीछे की पूरी कहानी और इसके भारत से जुड़े पहलुओं के बारे में।
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बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या: जमात-ए-इस्लामी पर गंभीर आरोप

शरीफ उस्मान हादी की हत्या का रहस्य


नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति को हिलाकर रख देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या के संबंध में एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी का हाथ हो सकता है। यह जानकारी संगठन के भीतर चल रही गहरी अंतर्विरोधों की ओर इशारा करती है।


जानकारी के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी तेजी से युवा मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हो रहे थे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और अलग राजनीतिक पहचान जमात-ए-इस्लामी के लिए चिंता का विषय बन गई थी। संगठन के एक हिस्से ने हादी को भविष्य के लिए खतरा मान लिया था। यह टकराव इतना बढ़ गया कि इसे समाप्त करने के लिए हिंसा का सहारा लिया गया।


इसी कारण उनके खिलाफ साजिश रची गई। यह मामला अब बांग्लादेश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, खासकर आगामी चुनावों और युवा मतदाताओं के संदर्भ में। हालांकि, ये सभी बातें दावों और जांच पर आधारित हैं। सूत्रों का कहना है कि हादी को खत्म करने की योजना ढाका स्थित जमात कार्यालय में बनाई गई थी। संगठन के एक धड़े ने हादी को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया। इस दौरान हत्या की सुपारी को लेकर भी अंदरूनी मतभेद सामने आए। प्रारंभ में एक करोड़ टका में हत्या कराने की बात हुई, लेकिन बाद में रकम को लेकर जमात के भीतर खींचतान शुरू हो गई। एक गुट का मानना था कि इतनी बड़ी राजनीतिक बाधा को हटाने के लिए रकम कम है, जबकि दूसरे गुट ने खर्च कम रखने की बात कही। इसी टकराव के दौरान यह मामला जमात के भीतर से लीक हुआ। यह भी दावा किया जा रहा है कि शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनी थी।


भारत से जुड़ाव का पहलू


इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कुछ दिन पहले हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश की गई थी। यह कहा गया कि आरोपी भारत भाग गए हैं और मेघालय में छिपे हुए हैं, लेकिन बांग्लादेश इस थ्योरी का कोई ठोस आधार नहीं दे सका। आरोपियों के दुबई भागने की कहानी गढ़ने की कोशिश की गई, लेकिन तब भी कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया।