बिजनौर में कुत्ते की रहस्यमयी परिक्रमा से भक्तों में उमड़ी आस्था
कुत्ते की अद्भुत हरकत से गांव में मची हलचल
बिजनौर जनपद के नगीना क्षेत्र के नंदपुर गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक कुत्ता पिछले चार दिनों से मंदिर में मूर्तियों की परिक्रमा कर रहा है। इस कुत्ते की इस रहस्यमयी गतिविधि को देखकर स्थानीय लोगों ने इसे सामान्य जानवर मानने से इंकार कर दिया है और इसे 'दैवीय रूप' मानकर पूजा करने लगे हैं। अब मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है और लोग दूर-दूर से इसे देखने आ रहे हैं।
कुत्ता बिना भोजन के कर रहा है परिक्रमा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह कुत्ता लगातार बिना रुके मंदिर की परिक्रमा कर रहा है। पहले तीन दिनों तक यह हनुमान जी की मूर्ति के चारों ओर घूमता रहा और अब मां दुर्गा की मूर्ति के चारों ओर चक्कर लगा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस कुत्ते ने पिछले चार-पांच दिनों में न तो कोई खाना खाया है और न ही पानी पिया है। ग्रामीणों ने उसे दूध और रोटी भी दी, लेकिन उसने उन्हें छुआ तक नहीं। गुरुवार को उसने लगभग तीन घंटे आराम किया, जिसके लिए ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में एक गद्दा बिछाया।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या
कुत्ते की इस स्थिति को देखकर गांव के लोग उसकी पूजा करने लगे हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मंदिर में आकर कुत्ते के सामने माथा टेक रहे हैं। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि इस कुत्ते में किसी साधु या ऋषि की आत्मा का वास है, जबकि अन्य इसे भगवान भैरवनाथ का रूप मानकर पूज रहे हैं। इस भीड़ के कारण मंदिर के बाहर प्रसाद और खिलौनों की अस्थायी दुकानें सज गई हैं, जिससे वहां मेले जैसा माहौल बन गया है।
डॉक्टरों की रिपोर्ट और ग्रामीणों की आस्था
इस घटना की जानकारी मिलने पर पशु चिकित्सकों की एक टीम ने कुत्ते की जांच की। डॉक्टरों ने बताया कि कुत्ते के सिर पर चोट लगने के कारण उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है, जिससे वह एक ही दिशा में घूम रहा है। हालांकि, ग्रामीणों ने इस वैज्ञानिक तर्क को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि कोई भी जीव सिर की चोट के बावजूद बिना खाए-पिए इतने दिनों तक लगातार परिक्रमा नहीं कर सकता, यह केवल किसी दैवीय शक्ति के कारण ही संभव है। इस प्रकार, नंदपुर गांव का यह मंदिर अंधविश्वास, आस्था और विज्ञान के बीच एक बहस का केंद्र बन गया है।
