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बिहार भाजपा की कोर कमेटी की बैठक रद्द, नए मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

बिहार भाजपा की कोर कमेटी की बैठक अचानक रद्द हो गई, जिससे नए मुख्यमंत्री के चयन पर कई सवाल उठने लगे हैं। बैठक में शामिल होने के लिए उपमुख्यमंत्रियों और प्रदेश अध्यक्ष ने दिल्ली का दौरा किया था, लेकिन अंतिम क्षणों में बैठक को रद्द कर दिया गया। पार्टी में संभावित मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति की कमी बताई जा रही है। इस स्थिति में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व एक केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति करने की योजना बना रहा है। चिराग पासवान ने भी खुद को मुख्यमंत्री की दौड़ से बाहर कर लिया है। अब सभी की नजरें एनडीए की आगामी बैठक पर हैं।
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बिहार भाजपा की कोर कमेटी की बैठक रद्द, नए मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

बैठक का अचानक रद्द होना


पटना। बिहार भाजपा की कोर कमेटी की बैठक, जो शनिवार को दिल्ली में आयोजित होने वाली थी, अंतिम क्षणों में रद्द कर दी गई। इस बैठक में भाग लेने के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्रियों (सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा) और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरवागी विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दिल्ली में मौजूद थे। सभी परिस्थितियाँ नए मुख्यमंत्री पर चर्चा के लिए अनुकूल थीं, लेकिन बैठक के अचानक रद्द होने से कई सवाल उठने लगे हैं। क्या भाजपा के मुख्यमंत्री के चयन में कोई समस्या आ गई है? क्या नीतीश कुमार असंतुष्ट हैं? क्या भाजपा के भीतर कोई असहमति उत्पन्न हो गई है?


क्या नाम पर सहमति की कमी थी?

पार्टी के सूत्रों के अनुसार, भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री के रूप में चर्चा में आए सम्राट चौधरी के नाम पर पार्टी में एकमत नहीं है। कुछ वरिष्ठ नेता इस नाम पर सहमत नहीं हैं। जब पार्टी में सर्वसम्मति नहीं बन पाई, तो बैठक को रद्द करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, इस सच को छिपाने के लिए बंगाल चुनाव की व्यस्तता का हवाला दिया गया। जब भाजपा में सत्ता हस्तांतरण में रुकावट आई, तो नीतीश कुमार भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। बैठक के रद्द होने से भाजपा की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।


पर्यवेक्षकों की नियुक्ति

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए एक केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति करेगा। यह मामला भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण बन गया है। बिहार का नया मुख्यमंत्री चुनने के अंतिम क्षणों में पार्टी का आत्मविश्वास कमजोर होता दिख रहा है। माना जाता है कि जब पार्टी में मतभेद होते हैं, तब पर्यवेक्षक के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकाला जाता है। पर्यवेक्षक बिहार भाजपा के नेताओं से सीधे बात कर अपनी राय प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद पटना में विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी। भाजपा नीतीश कुमार को लेकर अत्यधिक सतर्क है, ताकि जदयू के समर्थक यह न सोचें कि भाजपा ने चुनाव जीतने के बाद नीतीश को दरकिनार कर दिया है। अब सभी की नजरें एनडीए की आगामी बैठक और शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर टिकी हैं। जब तक नया नाम सामने नहीं आता, तब तक बिहार की राजनीति में यह सवाल बना रहेगा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा।


चिराग पासवान ने खुद को बाहर किया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में शपथ लेने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सत्ता के गलियारों में कई नामों की चर्चा हो रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है। एनडीए खेमे में भी यह विचार विमर्श जारी है कि राज्य की कमान किसे सौंपी जाए। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने स्पष्ट किया है कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि वे खुद को मुख्यमंत्री की रेस में नहीं देखते, जिससे उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें चिराग को संभावित मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जा रहा था।