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बिहार में चुनावों के दौरान 'जंगलराज' की चर्चा: क्या स्थिति में सुधार हुआ है?

बिहार में चुनावों के दौरान 'जंगलराज' की चर्चा एक बार फिर से गर्म हो गई है। लालू यादव और राबड़ी देवी के शासन के दौरान इस शब्द का उपयोग बढ़ा था। हाल की NCRB रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में हिंसक अपराधों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो इस बात का संकेत है कि स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। क्या बिहार में अपराध खत्म हो गए हैं? जानिए इस रिपोर्ट में।
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बिहार में चुनावों के दौरान 'जंगलराज' की चर्चा: क्या स्थिति में सुधार हुआ है?

बिहार में चुनाव और 'जंगलराज'

बिहार में चुनावों के समय 'जंगलराज' का शब्द राजनीतिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेता लालू यादव और राबड़ी देवी के शासन को इसी शब्द से संदर्भित करते हैं। चाहे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हों या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यह शब्द चुनावी सभाओं में बार-बार सुनाई देता है।


क्या 'जंगलराज' अब समाप्त हो गया है?

हालांकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में लालू यादव अब सलाहकार की भूमिका में हैं और पार्टी की बागडोर तेजस्वी यादव के हाथ में है, लेकिन बिहार में 'जंगलराज' पर बहस अभी भी जारी है। पिछले दो दशकों से बिहार में 'सुशासन' का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या वास्तव में अपराधों में कमी आई है? नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।


NCRB रिपोर्ट के अनुसार बिहार में हिंसक अपराध

NCRB की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हिंसक अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। 2024 में बिहार में 1,07,303 हिंसक अपराध दर्ज किए गए, जो 2023 के 52,165 मामलों से 105 प्रतिशत अधिक हैं। इसी तरह, महाराष्ट्र में 87,791 और उत्तर प्रदेश में 85,647 हिंसक अपराध हुए।


अपहरण की स्थिति

बिहार का नाम अपहरण के लिए बदनाम रहा है, विशेषकर 1990 से 2005 के बीच। आज भी, अपहरण की घटनाएं पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई हैं। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 2024 में 7305 अपहरण के मामले दर्ज हुए, जबकि महाराष्ट्र में 13,733 और उत्तर प्रदेश में 12,163 मामले सामने आए।


'जंगलराज' की उत्पत्ति

'जंगलराज' शब्द का उदय 1990 से 2005 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का शासन था। इस दौरान अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत खराब थी। 1997 में पटना हाईकोर्ट की एक बेंच ने टिप्पणी की थी कि बिहार की स्थिति 'जंगलराज' से भी बदतर है।