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बिहार में जदयू ने गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की

बिहार में भाजपा और जदयू ने विधानसभा चुनाव में गैर यादव पिछड़ी जातियों की राजनीति को अपनाया है। जदयू ने अब गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जिसके पीछे पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं। गिरधारी यादव पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को राजद की टिकट दिलवाई और मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल उठाया। इस स्थिति में उपचुनाव की संभावना भी बन रही है, जो एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकती है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
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बिहार में जदयू ने गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की

गैर यादव पिछड़ी जातियों की राजनीति

बिहार में भाजपा और जनता दल यू ने विधानसभा चुनाव में खुलकर गैर यादव पिछड़ी जातियों की राजनीति को अपनाया। इन दोनों दलों ने बड़े यादव नेताओं को टिकट नहीं दिया, जैसे नंदकिशोर यादव और रामसूरत राय। यह माना जा रहा है कि यादव बिहार में नवसामंत माने जाते हैं, और उनके खिलाफ वोटों का एकजुट होना आसान होता है। अब जदयू ने यादव सांसद गिरधारी यादव पर कार्रवाई की तलवार लटकाई है। नीतीश कुमार की पार्टी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर कहा है कि गिरधारी यादव ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लिया है, इसलिए उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। गिरधारी यादव बांका सीट से सांसद हैं और उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन को पिछले विधानसभा चुनाव में राजद की टिकट दिलवाई। दूसरी ओर, गिरधारी यादव का कहना है कि उनका बेटा विदेश से पढ़कर आया है और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।


सदस्यता रद्द करने के मुद्दे

गिरधारी यादव पर दूसरा आरोप यह है कि उन्होंने पिछले साल बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। इस पर जदयू ने अब कार्रवाई की है। यह ध्यान देने योग्य है कि जैसे गिरधारी यादव के बेटे ने राजद की टिकट से चुनाव लड़ा, वैसे ही नीतीश सरकार के मंत्री महेश्वर हजारी के बेटे सनी हजारी ने कांग्रेस की टिकट पर समस्तीपुर सीट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन जदयू ने महेश्वर हजारी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। अब 10 महीने बाद गिरधारी यादव के खिलाफ कार्रवाई क्यों हो रही है? ऐसा प्रतीत होता है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से विदाई की तैयारी के बीच जदयू विधायकों और सांसदों को अनुशासन का संदेश दे रहा है।


उपचुनाव की संभावना

हालांकि, यदि स्पीकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करते हैं, तो बांका सीट पर उपचुनाव होगा। भाजपा उपचुनाव से बचना चाहती है, क्योंकि उसके पास इस समय 240 सांसद हैं और सहयोगी दलों के साथ मिलकर यह संख्या 293 तक पहुंचती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि बांका सीट पर दिग्विजय सिंह एक बार निर्दलीय चुनाव जीत चुके हैं। इस सीट पर महान समाजवादी नेता मधु लिमये भी सांसद रह चुके हैं। ऐसे में उपचुनाव एनडीए के लिए एक परीक्षा की तरह साबित होगा।