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बिहार में ज्वैलरी दुकानों पर चेहरा ढककर आने वालों का प्रवेश प्रतिबंधित

बिहार में ज्वैलरी दुकानों ने सुरक्षा कारणों से चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। इस निर्णय पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है, जहां सत्ताधारी पार्टी ने समर्थन किया है, वहीं विपक्षी दल ने इसे संविधान के खिलाफ बताया है। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
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बिहार में ज्वैलरी दुकानों पर चेहरा ढककर आने वालों का प्रवेश प्रतिबंधित

बिहार में ज्वैलरी दुकानों का नया नियम

पटना। बिहार में ज्वैलरी दुकानों ने अब उन ग्राहकों को प्रवेश देने से मना कर दिया है, जो अपना चेहरा ढके हुए हैं। इसमें हिजाब, बुर्का, घूंघट पहने महिलाएं और मास्क, हेलमेट या नकाब पहनने वाले लोग शामिल हैं। ऑल इंडिया ज्वेलर्स गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) की राज्य इकाई ने सुरक्षा कारणों से यह निर्णय लिया है। इस पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस निर्णय का समर्थन किया है, जबकि विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसका विरोध कर रही है।


राजद का विरोध

यह कदम संविधान के खिलाफ: राजद

राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने बुधवार को एक बयान में कहा कि यह निर्णय भारत के संविधान और उसकी परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर हिजाब और नकाब को निशाना बनाना न केवल गलत है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।


भाजपा का समर्थन

भाजपा का कहना है कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है

भाजपा के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि सर्राफा दुकानदारों ने चेहरा ढककर आने वाले लोगों को दुकान में प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया है। यह किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि सोने-चांदी की कीमतों में वृद्धि के कारण चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, और यह निर्णय सुरक्षा के लिए लिया गया है।


दुकानों पर नोटिस

दुकानों में नोटिस चस्पा

रिपोर्टों के अनुसार, ज्वैलरी दुकानों में बढ़ती चोरी और लूट की घटनाओं के कारण यह निर्णय लिया गया है। राजधानी पटना में कई दुकानों के बाहर बुर्का, हिजाब, और हेलमेट पहने लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं।