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बिहार में भूमि माप प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि माप प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 2025 में नई सरकार के गठन के बाद, भूमि मापी व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं को कम करना है। 31 जनवरी 2026 तक सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाएगा और नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। जानें इस योजना के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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बिहार में भूमि माप प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नई पहल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के निवासियों को राहत देते हुए भूमि माप प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का ऐलान किया है। यह जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। 


मुख्यमंत्री ने बताया कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार के गठन के बाद बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने के लिए ‘सात निश्चय-3 (2025-30)’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ का उद्देश्य आम नागरिकों की दैनिक समस्याओं को कम करना है।


नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में अक्सर देखा जाता है कि भूमि माप के लिए आवेदन देने के बाद प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है। इससे लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और समय पर माप नहीं होने के कारण भूमि विवाद भी उत्पन्न होते हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भूमि मापी व्यवस्था में सुधार का निर्णय लिया है।


मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 31 जनवरी 2026 तक विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसमें अविवादित भूमि माप के लिए अधिकतम 7 कार्य दिवस में माप सुनिश्चित की जाएगी। विवादित भूमि की माप अधिकतम 11 कार्य दिवस में पूरी की जाएगी।


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माप प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमीन द्वारा मापी का प्रतिवेदन आवेदक की आवेदन तिथि के 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आवेदकों को समय पर जानकारी मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि समय सीमा के भीतर भूमि माप सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था करेगा। पूरी प्रक्रिया की सख्त निगरानी भी की जाएगी ताकि किसी स्तर पर लापरवाही न हो।


नीतीश कुमार ने विश्वास जताया कि भूमि मापी प्रक्रिया को सरल बनाने की यह पहल प्रदेशवासियों के लिए लाभकारी साबित होगी और भूमि विवादों में कमी आएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि इस नई व्यवस्था को लेकर कोई सुझाव हो, तो वे 25 जनवरी तक अपने सुझाव सरकार तक पहुंचाएं।