बिहार में मैथिली भाषा को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय
मैथिली भाषा को मिली मान्यता
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा को मातृभाषा के रूप में मान्यता देने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इसे गर्व का विषय बताया है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने आगे कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली को मातृभाषा के रूप में मान्यता मिलना मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गर्व का प्रतीक है।
सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण को नई मजबूती मिल रही है। यह निर्णय मैथिली को नई पहचान और सम्मान प्रदान करेगा, साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में माध्यमिक स्तर पर मैथिली को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की है। यह जानकारी केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर को लिखे पत्र में दी।
पत्र में बताया गया कि 8 फरवरी 2026 को सांसद डॉ. ठाकुर द्वारा भेजे गए अनुरोध के बाद इस मामले की जांच की गई। जांच में पाया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने पर जोर दिया गया है।
नीति के अनुसार, कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जानी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है।
