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बेंगलुरु में डेंटल छात्रा यशस्विनी की आत्महत्या: क्या है इसके पीछे का सच?

बेंगलुरु में 23 वर्षीय डेंटल छात्रा यशस्विनी ने आत्महत्या कर ली, जिसके पीछे उसके कॉलेज के शिक्षकों द्वारा किए गए मानसिक उत्पीड़न का आरोप है। परिवार का कहना है कि यशस्विनी को उसके रंग और कपड़ों पर अपमानित किया गया। इस घटना के बाद छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले में 6 शिक्षकों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। जानें इस दुखद घटना के बारे में और क्या कदम उठाए गए हैं।
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बेंगलुरु में डेंटल छात्रा यशस्विनी की आत्महत्या: क्या है इसके पीछे का सच?

बेंगलुरु में एक दुखद घटना


बेंगलुरु: एक अत्यंत दुखद घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। 23 वर्षीय डेंटल छात्रा यशस्विनी ने अपने घर में आत्महत्या कर ली। उसके परिवार का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से कॉलेज के कुछ शिक्षकों ने उसका मानसिक उत्पीड़न किया, जिससे वह इतनी परेशान हो गई कि उसने यह कदम उठाया।


सपनों का अंत

यशस्विनी बेंगलुरु के ऑक्सफोर्ड डेंटल कॉलेज में तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी में पढ़ाई कर रही थी और डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। वह अपने माता-पिता की एकमात्र संतान थी। लेकिन कॉलेज में उसके साथ हुए व्यवहार ने उसके आत्मविश्वास को पूरी तरह से तोड़ दिया।


परिवार के अनुसार, कुछ शिक्षकों ने उसकी त्वचा के रंग पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, "इस चेहरे के साथ तुम डॉक्टर कैसे बनोगी?" इसके अलावा, उसके कपड़ों और ड्रेसिंग स्टाइल का भी मजाक उड़ाया जाता था, जिससे यशस्विनी बहुत दुखी रहती थी।


सुसाइड नोट और परिवार का आरोप

एक दिन, आंखों में दर्द के कारण यशस्विनी ने छुट्टी ली। अगले दिन कॉलेज पहुंचने पर शिक्षकों ने उसे अन्य छात्रों के सामने शर्मिंदा किया। आंखों की दवा के बारे में व्यंग्य किया गया, जैसे "क्या तुमने पूरी बोतल खत्म कर दी?" सेमिनार में भाग न ले पाने पर भी उसे सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाया गया। परिवार का कहना है कि उसे रेडियोलॉजी के केस नहीं दिए गए और लगातार अपमान से उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ती गई।


यशस्विनी ने एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने खुद को जिम्मेदार ठहराया और किसी को दोषी नहीं ठहराया। लेकिन उसकी मां परिमला का कहना है कि यह नोट दबाव में लिखा गया था। वह मानती हैं कि असली कारण कॉलेज के शिक्षकों का क्रूर व्यवहार था।


छात्रों का विरोध और कार्रवाई

इस घटना के बाद, कॉलेज के छात्रों ने मोर्चरी के बाहर "जस्टिस फॉर यशस्विनी" के नारे लगाए। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। छात्रों का कहना था कि ऐसी घटनाएं रुकनी चाहिए, ताकि कोई और छात्र ऐसी स्थिति में न आए।


पुलिस ने मां की शिकायत पर 6 फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। इनमें डॉ. अनमोल, डॉ. अल्बा, डॉ. शबाना, डॉ. फाइका, डॉ. सिंधु और डॉ. सुष्मिनी शामिल हैं। कॉलेज प्रशासन ने भी इन छह शिक्षकों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। कॉलेज ने कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।