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बेमौसम बारिश ने कृषि क्षेत्र में मचाई तबाही, किसानों में आक्रोश

हाल ही में आई बेमौसम बारिश ने देश के कृषि क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। किसान फसल काटने की तैयारी में थे, लेकिन चक्रवात ने उनकी मेहनत को बर्बाद कर दिया। हरियाणा और पंजाब की मंडियों में अव्यवस्था के कारण किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मौसम विज्ञानियों ने आगामी सप्ताह में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे फसलों की कटाई में देरी हो सकती है। जानें इस संकट के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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बेमौसम बारिश ने कृषि क्षेत्र में मचाई तबाही, किसानों में आक्रोश

कृषि बेल्ट में बेमौसम बारिश का असर

चंडीगढ़. मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में आई इस अप्रत्याशित बारिश ने देश के कृषि क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। किसान फसल काटने की तैयारी में थे, लेकिन मंगलवार और बुधवार को आए चक्रवात ने खेतों में खड़ी सुनहरी फसल को बर्बाद कर दिया। हरियाणा के हिसार, भिवानी और गुरुग्राम से लेकर पंजाब के फाजिल्का तक ओलों की ऐसी बौछार हुई कि फसलें झुक गईं। आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पककर तैयार गेहूं के पौधे जड़ से उखड़कर जमीन पर गिर गए, जिससे दाना काला पड़ने और पैदावार में कमी का बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है।


मंडियों में अव्यवस्था और किसानों का गुस्सा

फसल के नुकसान की खबरों के बीच मंडियों से आई तस्वीरों ने सरकार के दावों की सच्चाई को उजागर कर दिया है। हरियाणा और पंजाब की कई अनाज मंडियों में तिरपाल और ऊंचे चबूतरों की कमी के कारण किसानों की लाई गई उपज भीगकर खराब हो गई। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने गेहूं खरीद के लिए उचित इंतजाम नहीं किए, जिसके कारण उनकी मेहनत की फसल कीचड़ में मिल गई। फाजिल्का के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गिरदावरी (नुकसान का सर्वे) कराकर मुआवजे का ऐलान नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


आगामी सप्ताह में बारिश की संभावना

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। 2 अप्रैल को उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश हो सकती है, जबकि 3 अप्रैल को भी हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता 4 और 5 अप्रैल को है, जब हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी का अनुमान है। इसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ेगा, जिससे पकी हुई फसलों में नमी बढ़ेगी और कटाई में 10 से 15 दिनों की देरी हो सकती है। फिलहाल नांदेड़ सहित कई जिलों में गुरुवार तक 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।


पशुहानि और बागवानी को नुकसान

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में मौसम ने एक ही दिन में दो रूप दिखाए। वर्धा और नागपुर में जहां दोपहर का तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस के पार था, वहीं शाम को हुई मूसलधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी। नांदेड़ जिले में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां सोमवार रात चली तूफानी हवाओं ने आम, खरबूजे और तरबूज के बागों को बर्बाद कर दिया। अर्धापुर तालुका के लहान गांव में बिजली गिरने से एक दुधारू गाय की मौत हो गई, जिससे गरीब किसान पर दोहरी मार पड़ी है। कटाई के बाद खुले में रखे हल्दी के स्टॉक और गर्मियों की ज्वार की फसल भी इस बारिश की भेंट चढ़ गई है।