बैंकिंग प्रणाली को समावेशी बनाने की आवश्यकता: एम. नागराजू
बैंकिंग क्षेत्र का विकास में योगदान
विकसित भारत के लक्ष्य के लिए बैंकिंग प्रणाली का महत्व
बिजनेस डेस्क: भारत के आर्थिक विकास और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, देश की बैंकिंग प्रणाली को अधिक समावेशी और मजबूत बनाना आवश्यक है। इससे बैंकों की योजनाओं का लाभ सभी उद्यमियों और आम नागरिकों तक पहुँच सकेगा। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने एक ग्रोथ कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत को 'विकसित भारत' बनाने के लिए बैंकिंग क्षेत्र और कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में व्यापक सुधारों की योजना बनाई जा रही है।
उच्च स्तरीय समिति का गठन
नागराजू ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति जल्द ही कार्य शुरू करेगी। इस पहल का उद्देश्य प्रणाली को अधिक समावेशी बनाना और छोटे व्यवसायियों से लेकर किसानों तक सस्ते ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
वित्त मंत्री का बजट भाषण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को अपने बजट भाषण में 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति' के गठन का प्रस्ताव रखा था। नागराजू के अनुसार, सरकार जल्द ही इस पैनल के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' की घोषणा करेगी। समिति का मुख्य कार्य बैंकिंग क्षेत्र की समग्र समीक्षा करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बैंकिंग प्रणाली भारत की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
सस्ती पूंजी और कड़े नियमों की आवश्यकता
सचिव ने स्पष्ट किया कि वित्तीय प्रणाली की सफलता केवल पूंजी की प्रचुरता में नहीं, बल्कि इसकी क्षमता में निहित है। जब ऋण की लागत परियोजनाओं के अंतर्निहित जोखिम से अधिक होती है, तो कई संभावित परियोजनाएं शुरू नहीं हो पाती हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव पहली पीढ़ी के उद्यमियों, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण ऋणकर्ताओं पर पड़ता है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि किसानों के लिए फसल वित्त और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए किफायती दर पर पूंजी उपलब्ध हो।
