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बैंकों के कर्ज निपटारे पर चर्चा: जेपी एसोसिएट्स का मामला

अनिल अग्रवाल द्वारा जेपी एसोसिएट्स के सौदे पर लिखी गई पोस्ट ने बैंकों के कर्ज निपटारे और गरीबों पर जुर्माना वसूली के मुद्दे को उजागर किया है। इस मामले में 57 हजार करोड़ रुपये का कर्ज 14,535 करोड़ रुपये में सेटल किया जा रहा है, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हो रहा है। जानिए इस सौदे के पीछे की कहानी और इसके प्रभावों के बारे में।
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बैंकों के कर्ज निपटारे पर चर्चा: जेपी एसोसिएट्स का मामला

जेपी एसोसिएट्स का कर्ज निपटारा

वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल द्वारा जेपी एसोसिएट्स के सौदे पर लिखी गई पोस्ट ने चर्चा का एक नया विषय प्रस्तुत किया है। इस मामले ने दिवालिया संहिता (IBC) के तहत होने वाले सौदों और कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स के कार्यों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उल्लेखनीय है कि जेपी एसोसिएट्स पर 57 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसे 14,535 करोड़ रुपये में सेटल किया जा रहा है। इसका मतलब है कि बैंकों को 57 हजार करोड़ रुपये के बदले में केवल 14,535 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि शेष 43 हजार करोड़ रुपये डूब जाएंगे। यह केवल एक उदाहरण है, क्योंकि इसी तरह के कई मामलों में बैंकों को हजारों करोड़ रुपये के कर्ज कौड़ियों के दाम पर निपटाए गए हैं।


हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने बताया कि बैंकों ने पिछले तीन वर्षों में न्यूनतम बैलेंस न रख पाने के कारण गरीबों के खातों से 18 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है। यह सोचने वाली बात है कि बैंक इतनी सख्ती से जुर्माना वसूलते हैं, लेकिन एक ही सौदे में 43 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने पर कोई चिंता नहीं जताई जाती। इस सौदे के तहत अडानी समूह को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चार हजार एकड़ भूमि मिलेगी, साथ ही लाखों टन क्षमता वाले दो सीमेंट प्लांट और ग्रेटर नोएडा में फॉर्मूला वन रेस का ट्रैक भी मिलेगा। कहा जा रहा है कि अडानी समूह के एक सदस्य को फॉर्मूला वन रेस बहुत पसंद है। इसके अलावा, सहारा समूह की संपत्तियों को भी इसी तरह के सौदों में अडानी समूह को सौंपा जा रहा है।