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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को चुनाव ड्यूटी पर कोर्ट स्टाफ लगाने पर फटकारा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी के कमिश्नर भूषण गगरानी द्वारा निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि कमिश्नर के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है। इस मामले में अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और कोर्ट की टिप्पणियाँ।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को चुनाव ड्यूटी पर कोर्ट स्टाफ लगाने पर फटकारा

आदेश पर रोक लगाई गई, कोर्ट ने कहा- आपके पास ये अधिकार नहीं


बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कमिश्नर भूषण गगरानी ने 22 दिसंबर को एक पत्र जारी कर निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का आदेश दिया था। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह स्वत: संज्ञान लेते हुए रोक लगा दी। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा कि कमिश्नर के पास यह अधिकार नहीं है।


कमिश्नर के वकील ने कहा कि यह आदेश एक गलती थी और इसे वापस ले लिया गया है। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम की बेंच ने कहा कि अब आप अपनी स्थिति को स्पष्ट करें। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी। चुनाव के बाद हम आपकी बात सुनेंगे।


निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का आदेश

22 दिसंबर, 2025 को कमिश्नर ने शहर की सभी निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था। उसी दिन, चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने कमिश्नर और मुंबई शहर के कलेक्टर को सूचित किया कि हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध किया है।


रजिस्ट्रार (निरीक्षण) द्वारा भी इसी तरह का एक पत्र भेजा गया था, जिसमें सिविक प्रमुख को हाईकोर्ट द्वारा पारित प्रशासनिक आदेश के बारे में सूचित किया गया था। इसके बावजूद, कमिश्नर ने 29 दिसंबर को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को एक पत्र भेजकर सूचित किया कि निचली अदालतों के स्टाफ को छूट देने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है।


कोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट की एडमिनिस्ट्रेटिव जजेस कमेटी ने यह निर्णय लिया था कि हाईकोर्ट और सभी निचली अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी। भारत के संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत, हाईकोर्ट निचली अदालतों पर, कर्मचारियों सहित, पूरा नियंत्रण और पर्यवेक्षण रखता है। इसी आधार पर कोर्ट के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का आदेश पारित किया गया था।