Newzfatafatlogo

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग की ऐतिहासिक उपस्थिति

भारत इस साल सितंबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होंगे। यह सम्मेलन नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होगा। पुतिन और जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी होगी, जो वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकती है। इस सम्मेलन से पहले, शंघाई सहयोग संगठन का सम्मेलन भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों नेता शामिल होने की संभावना रखते हैं। ब्रिक्स अब 11 देशों का एक शक्तिशाली समूह बन चुका है, जो वैश्विक जीडीपी और व्यापार का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है।
 | 
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग की ऐतिहासिक उपस्थिति

नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारी

नई दिल्ली: भारत इस वर्ष सितंबर में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है। यह महासम्मेलन 12 और 13 सितंबर को राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसमें विश्व की दो प्रमुख शक्तियों के शामिल होने की पुष्टि हुई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में भाग लेंगे। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने भारत सरकार को इसकी आधिकारिक सूचना दे दी है, और रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की है।


पुतिन और जिनपिंग की महत्वपूर्ण मुलाकात

दिल्ली में होगी पुतिन और जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात

क्रेमलिन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया है कि राष्ट्रपति पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस यात्रा की खास बात यह है कि सम्मेलन के दौरान पुतिन और शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक भी निर्धारित की गई है। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें रहेंगी। यह पुतिन का एक साल में दूसरा भारत दौरा होगा, इससे पहले उन्होंने दिसंबर 2025 में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। इसी महीने की शुरुआत में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी नई दिल्ली में ब्रिक्स सदस्य देशों के सम्मेलन में शामिल हुए थे।


शी जिनपिंग का भारत दौरा

7 साल बाद भारत की धरती पर कदम रखेंगे चीनी राष्ट्रपति

ब्रिक्स सम्मेलन के अलावा, शी जिनपिंग का यह दौरा कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह लगभग सात वर्षों के बाद पहली बार भारत आ रहे हैं। इससे पहले, उन्होंने 2019 में भारत का दौरा किया था, जब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए चेन्नई के मामल्लापुरम पहुंचे थे। इस प्रकार, 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनकी उपस्थिति नए भू-राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकती है। उल्लेखनीय है कि सितंबर में होने वाले इस सम्मेलन से पहले 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सम्मेलन भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन दोनों के शामिल होने की संभावना है।


ब्रिक्स का विस्तार

अब 11 देशों का शक्तिशाली समूह बन चुका है ब्रिक्स

ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का संगठन नहीं रह गया है, बल्कि यह 11 तेजी से विकास कर रहे देशों का एक विशाल और शक्तिशाली समूह बन चुका है। प्रारंभ में इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। लेकिन 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इस समूह में शामिल होने की घोषणा की। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी इस संगठन का हिस्सा बन गया। आज यह 11 देशों का समूह दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा, वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार का 26 प्रतिशत हिस्सा इन देशों के पास है, जो इसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।