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ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से किया इनकार, ईरान पर हमले की योजना प्रभावित

ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने एयरबेस का उपयोग करने से मना कर दिया है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हैं। यह निर्णय चागोस द्वीप समूह के मॉरीशस को सौंपने के समझौते से जुड़ा है। अमेरिका डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का उपयोग करना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन के पुराने समझौतों के अनुसार, इसका उपयोग केवल प्रधानमंत्री की अनुमति से ही संभव है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
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ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से किया इनकार, ईरान पर हमले की योजना प्रभावित

अमेरिका का ईरान पर हमला करने का इरादा


ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए अपने एयरबेस का उपयोग करने से मना कर दिया है। अमेरिका इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन ने इसे अस्वीकार कर दिया। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्णय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प असंतुष्ट हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस समझौते से समर्थन वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने की बात थी।


अमेरिका की हमले की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान पर हमले की योजना बना रहा है और इसके लिए डिएगो गार्सिया और ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का उपयोग करना चाहता है। डिएगो गार्सिया, चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो 1970 के दशक से ब्रिटेन और अमेरिका का साझा सैन्य अड्डा रहा है।


ब्रिटेन की सैन्य ठिकानों का उपयोग

पुराने समझौतों के अनुसार, ब्रिटेन के किसी भी सैन्य ठिकाने का उपयोग तभी किया जा सकता है जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री इसकी अनुमति दें। अंतरराष्ट्रीय कानून भी यह कहता है कि यदि कोई देश जानता है कि सैन्य कार्रवाई गलत है और फिर भी सहायता करता है, तो उसे भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।


ट्रम्प की आलोचना

ट्रम्प ने चागोस आइलैंड्स को लेकर ब्रिटेन की आलोचना की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि 100 साल की लीज किसी देश के मामले में उचित निर्णय नहीं है। उन्होंने कहा कि डिएगो गार्सिया को छोड़ना एक बड़ी गलती होगी।


ब्रिटेन का तर्क

ब्रिटिश सरकार का कहना है कि मॉरीशस के साथ समझौता सुरक्षा कारणों से आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे लंबे और महंगे कानूनी विवाद से बचा जा सकेगा। इस पूरे समझौते पर लगभग 35 बिलियन पाउंड का खर्च आ सकता है।


डिएगो गार्सिया का महत्व

डिएगो गार्सिया ईरान पर हमले के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। यहां से अमेरिका दूर तक और तेजी से सैन्य ऑपरेशन चला सकता है।


अमेरिका का पूर्व अनुभव

इस बेस पर बड़ा एयरफील्ड है, जहां भारी बमवर्षक विमान जैसे बी-2 और बी-52 उड़ान भर सकते हैं। यह ठिकाना ब्रिटेन और अमेरिका दोनों द्वारा साझा किया जाता है, लेकिन अमेरिका के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशन सेंटर बन चुका है।