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भारत ऐतिहासिक परिवर्तन की ओर: शक्तिकांत दास का बयान

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने हाल ही में भारत के ऐतिहासिक बदलाव की यात्रा पर चर्चा की। उन्होंने वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ के खतरों के बीच आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया। दास ने बताया कि भारत अब 'इनक्रेडिबल इंडिया' से 'क्रेडिबल इंडिया' बनने की दिशा में अग्रसर है। उनका यह बयान वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के संदर्भ में आया है, जिसमें अमेरिका की नीतियों का भी उल्लेख किया गया है।
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भारत ऐतिहासिक परिवर्तन की ओर: शक्तिकांत दास का बयान

भारत की यात्रा: 'इनक्रेडिबल' से 'क्रेडिबल'


शक्तिकांत दास का बयान


प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने हाल ही में कहा कि भारत अब 'इनक्रेडिबल इंडिया' से 'क्रेडिबल इंडिया' बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में व्यापार और आर्थिक संबंधों की स्थिति तेजी से बदल रही है।


दास ने कहा कि वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ के खतरों के बीच हमें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले कुछ दशकों में वैश्वीकरण को समर्थन देने वाली आम सहमति अब कमजोर हो चुकी है।


भारत ने 'आत्मनिर्भरता' को अपनी नीतियों का मुख्य आधार बनाया है। दास ने इस अवधारणा की व्याख्या करते हुए कहा कि यह समय भारत के लिए ऐतिहासिक बदलाव का है।


अमेरिका की नीतियों पर चिंता

दास का यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव हो रहा है। अमेरिका 'रूसी तेल पर प्रतिबंध विधेयक' पर विचार कर रहा है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।


उन्होंने कहा कि पारंपरिक बहुपक्षवाद अब भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण कमजोर हो गया है। दास ने बताया कि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थान अपने मूल कार्यों को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं।


व्यापार का नया स्वरूप

दास ने कहा कि व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं का उपयोग अब व्यवधान और प्रभुत्व के साधन के रूप में किया जा रहा है। 'री-शोरिंग' और 'फ्रेंड-शोरिंग' जैसी प्रवृत्तियाँ वैश्विक नेटवर्क को प्रभावित कर रही हैं।


हालांकि, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत कोविड-19 संकट के बाद से आए वैश्विक झटकों से सफलतापूर्वक उबर चुका है। दास ने कहा, "अब देश द्वारा अपनाई गई नीतियों के साथ, हवा हमारे पक्ष में है। हम वास्तव में 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहे हैं।"