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भारत और जापान की मित्रता: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत को जापान का समर्थन मिला है। दोनों देशों ने मिलकर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की है। जापान का यह कदम एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है, जो दर्शाता है कि अब दुनिया भारत की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। जानें इस मित्रता के महत्व और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता के संदेश के बारे में।
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भारत और जापान की मित्रता: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

भारत को जापान का समर्थन

हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत को अपने मित्र जापान का समर्थन प्राप्त हुआ है। जापान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और भारत के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौरे के दौरान, यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। भारत ने हमेशा से यह बताया है कि पाकिस्तान से संचालित ये आतंकवादी संगठन क्षेत्र की शांति के लिए खतरा हैं। इस बार, जापान की आवाज़ भी भारत के साथ जुड़ गई, जिससे यह संदेश और भी प्रभावशाली बन गया।


दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी देशों से अपील की है कि वे लश्कर और जैश जैसे संगठनों की फंडिंग, उनके प्रशिक्षण शिविरों और समर्थकों पर कड़ी कार्रवाई करें।


जापान का भारत के समर्थन में खुलकर बोलना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है। जापान, जो अपनी शांतिप्रिय नीतियों के लिए जाना जाता है, का आतंकवाद के खिलाफ इतना सख्त रुख अपनाना दर्शाता है कि अब दुनिया भारत की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। यह उन देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो आतंकवाद के अच्छे और बुरे रूप में भेदभाव करते हैं।


पहलगाम में निर्दोषों का खून बहाने वाले शायद यह भूल गए थे कि भारत अब अकेला नहीं है। भारत और जापान की मित्रता अब केवल बुलेट ट्रेन और व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनने का प्रतीक है।