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भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है, जिससे भारतीय निर्यातकों को लाभ होगा। न्यूजीलैंड में लगभग 70 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे भारतीय सामान अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीति और इसके संभावित लाभ।
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर आज होगा हस्ताक्षर


दोनों देशों के बीच आज होंगे मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर


India-New Zealand FTA, बिजनेस डेस्क : पिछले वर्ष अमेरिका द्वारा अन्य देशों पर लगाए गए उच्च टैरिफ के चलते, भारत ने अपनी व्यापार नीति में बदलाव करते हुए अन्य प्रमुख देशों के साथ व्यापारिक समझौतों को प्राथमिकता दी। इसी क्रम में, भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।


यह समझौता पिछले साल 22 दिसंबर को बातचीत समाप्त होने की घोषणा के चार महीने बाद हो रहा है। इसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके पांच अरब डॉलर तक पहुंचाना है। इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को होगा, क्योंकि न्यूजीलैंड में लगभग 70 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे भारतीय सामान न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।


वर्तमान व्यापार स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा। वहीं, 2024 में वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार लगभग 2.4 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें सेवाओं का व्यापार 1.24 अरब डॉलर रहा। इसमें यात्रा, सूचना प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


न्यूजीलैंड के पीएम का बयान

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पहले ही इस समझौते के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने और बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। लक्सन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम सोमवार को भारत के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करेंगे। एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, विशेषकर उन कंपनियों को जो नावों में उपयोग होने वाले मरीन जेट सिस्टम का निर्माण करती हैं।