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भारत और यूएई के बीच नई आर्थिक साझेदारी: एक महत्वपूर्ण कदम

भारत और यूएई के बीच हाल ही में हुई आर्थिक साझेदारी ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया है। इस समझौते में सीधे निवेश पर जोर दिया गया है, जो भारत के औद्योगिक विकास को गति देगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग और भविष्य की तकनीकों पर साझेदारी भी महत्वपूर्ण है। जानें इस समझौते के विभिन्न पहलुओं के बारे में और कैसे यह भारत की रणनीतिक ताकत को बढ़ा रहा है।
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भारत और यूएई के बीच नई आर्थिक साझेदारी: एक महत्वपूर्ण कदम

भारत-यूएई की नई साझेदारी


नई दिल्ली: कूटनीति में यह कहा जाता है कि वास्तविक सफलता शोर से नहीं, बल्कि परिणामों से मापी जाती है। हाल के घटनाक्रम में यह अंतर स्पष्ट है। एक ओर, पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ अपनी डील को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दूसरी ओर, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बिना किसी हंगामे के एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है।


यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा भले ही संक्षिप्त रही, लेकिन इसके निर्णय दीर्घकालिक महत्व के हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात भले ही थोड़ी देर की थी, लेकिन इस दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।


आंकड़ों की कहानी

यदि हम आंकड़ों की दृष्टि से देखें, तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ लगभग 20 अरब डॉलर के व्यापार और निवेश लक्ष्य की बात कर रहा है, जबकि उसका वर्तमान व्यापार अभी भी सीमित है। दूसरी ओर, भारत और यूएई का आपसी व्यापार पहले ही 100 अरब डॉलर को पार कर चुका है, और अब दोनों देशों ने इसे अगले कुछ वर्षों में 200 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।


निवेश पर जोर

भारत-यूएई समझौते की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें कर्ज के बजाय सीधे निवेश पर ध्यान केंद्रित किया गया है। गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं पर सहमति बनी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक शहर और बंदरगाह का विकास शामिल है। यह निवेश भारत के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे को नई गति प्रदान करेगा।


भविष्य की तकनीक में सहयोग

भारत और यूएई की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश भविष्य की तकनीकों पर मिलकर काम करने की योजना बना रहे हैं। इसमें अंतरिक्ष क्षेत्र में सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च सुविधाओं पर सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझा प्रयास शामिल हैं, जो इस रिश्ते की दीर्घकालिक सोच को दर्शाते हैं।


रक्षा क्षेत्र में सहयोग

दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में भी रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब यह केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण पर भी जोर दिया जाएगा। इससे भारत के रक्षा उद्योग को नई ताकत मिलेगी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


सोच और नीति का अंतर

भारत और पाकिस्तान के बीच का अंतर केवल आर्थिक आंकड़ों का नहीं है, बल्कि यह सोच और नीति का भी है। भारत पहले मजबूत आधार तैयार करता है और फिर बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ता है, जबकि पाकिस्तान अक्सर उम्मीदों और कर्ज के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश करता है।