भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता: 5 साल के लिए मोस्ट फेवर्ड नेशन दर्जा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौता
भारत और यूरोपीय संघ ने एक प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत एक-दूसरे को पांच वर्षों के लिए 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा देने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष व्यापार में समान रियायतें देंगे और एक-दूसरे के साथ भेदभाव नहीं करेंगे। यह द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मोस्ट फेवर्ड नेशन का प्रभाव
मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा मिलने से आयात और निर्यात पर समान शुल्क और नियम लागू होंगे। इसका अर्थ है कि किसी एक देश को दी गई छूट दूसरे से छिपाई नहीं जाएगी। इससे व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कंपनियों को यह विश्वास होगा कि नियम अचानक नहीं बदलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था व्यापार को सरल बनाएगी और निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है।
उच्चस्तरीय वार्ताओं का परिणाम
यह मसौदा पिछले महीने नई दिल्ली में हुई लंबी बैठकों का परिणाम है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई दौर की चर्चा की। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य समझौते के अंतिम रूप पर सहमति बनाना था।
विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र का निर्माण
यदि यह समझौता लागू होता है, तो यह लगभग दो अरब लोगों को कवर करने वाला एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाएगा। यह क्षेत्र वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दर्शाता है। लगभग 27 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक आसान पहुंच मिलने से व्यापार के नए अवसर खुल सकते हैं। उद्योग जगत इसे एक अवसर के रूप में देख रहा है।
IMEC कॉरिडोर पर ध्यान
प्रधानमंत्री मोदी ने IMEC कॉरिडोर को व्यापार और टिकाऊ विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की बात की है। उनका कहना है कि बेहतर संपर्क और बुनियादी ढांचे से माल की आवाजाही में तेजी आएगी, जिससे भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
