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भारत और रूस का संयुक्त उद्यम: उर्वरक उत्पादन में नई दिशा

पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे उर्वरक उत्पादन पर असर पड़ा है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत ने रूस के साथ मिलकर एक फर्टिलाइजर प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह प्लांट समारा में बनेगा और अगले दो वर्षों में तैयार होगा। इस परियोजना में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा। जानें इस महत्वपूर्ण परियोजना के बारे में और क्या है इसका महत्व।
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भारत और रूस का संयुक्त उद्यम: उर्वरक उत्पादन में नई दिशा

भारत में उर्वरक उत्पादन पर असर

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रही संघर्ष के कारण भारत में तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आई है, जिसका प्रभाव उर्वरक के उत्पादन और वितरण पर पड़ा है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने वैकल्पिक उपायों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। इसके तहत, रूस के साथ मिलकर एक फर्टिलाइजर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। यह प्लांट रूस के समारा में बनाया जाएगा और इसके अगले दो वर्षों में तैयार होने की उम्मीद है। हाल ही में इस परियोजना के संबंध में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस का दौरा किया है।


भारत और रूस के इस संयुक्त उद्यम में लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 20 लाख टन होगी। यूरिया उत्पादन के इस प्रोजेक्ट में भारत की तीन प्रमुख कंपनियां, इंडियन पोटाश लिमिटेड, आरसीएफ और एनएफएल शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से भारत खाद के आयात पर निर्भरता को कम करने का प्रयास कर रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत अपनी कृषि के लिए नाइट्रोजन आधारित यूरिया खाद पर अत्यधिक निर्भर है। इन तीनों कंपनियों द्वारा 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जबकि शेष 10,000 करोड़ रुपये रूस की केमिकल कंपनी यूरालकेम ग्रुप द्वारा लगाए जाएंगे।