भारत और संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी कोष की समीक्षा बैठक
भारत का स्थायी मिशन और संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी कोष
नई दिल्ली। भारतीय स्थायी मिशन ने न्यूयॉर्क में शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी कोष के निदेशक मंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में कोष के संचालन की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने कोष के भविष्य की दिशा पर भी विचार-विमर्श किया। भारत के स्थायी मिशन ने बताया कि इस बैठक में निदेशक मंडल ने कोष के कार्यों की समीक्षा की और चल रही परियोजनाओं का मूल्यांकन किया।
भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी कोष का उद्देश्य ग्लोबल साउथ में साझा समृद्धि को बढ़ावा देना है। यह कोष विकासशील देशों की उन पहलों में योगदान करता है जो सतत विकास के 2030 एजेंडा को साकार करने में सहायक हैं। 2017 में स्थापित इस कोष की कुल राशि 150 मिलियन डॉलर है, जिसे भारत सरकार द्वारा समर्थित और संचालित किया जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के सहयोग से कार्यान्वित होता है। यह कोष विकासशील देशों में मांग-आधारित और परिवर्तनकारी सतत विकास परियोजनाओं का समर्थन करता है, विशेष रूप से सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां सहयोगी सरकारों के साथ मिलकर इस फंड की परियोजनाओं को लागू करती हैं। भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी फंड की कॉमनवेल्थ विंडो का उद्देश्य कॉमनवेल्थ ऑफ़ नेशंस के विकासशील देशों में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति देना है। कॉमनवेल्थ ऑफ़ नेशंस स्वतंत्र और समान संप्रभु राज्यों का एक स्वैच्छिक समूह है, जिसमें मुख्य रूप से ब्रिटिश साम्राज्य के पूर्व क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। इस कॉमनवेल्थ विंडो द्वारा समर्थित देश विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं, जिनमें कॉमनवेल्थ के कुछ सबसे अधिक संवेदनशील सदस्य देश भी शामिल हैं।
कॉमनवेल्थ देशों के बीच तकनीकी और सतत विकास के प्रयास विशेष रूप से प्रासंगिक और लाभकारी हैं।
