भारत की UN में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा: ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा
भारत की चिंता का इजहार
नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। गुरुवार को UN महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरिश पी ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले अस्वीकार्य हैं। उन्होंने सुरक्षित नौवहन की तात्कालिक बहाली की मांग की और क्षेत्र में तनाव को कम करने की अपील की।
ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण पहलू
हरिश पी ने बताया कि समुद्री सुरक्षा भारत के ऊर्जा और आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली व्यापारिक गतिविधियाँ भारत के लिए बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि निर्दोष नाविकों की जान को खतरे में डालना और व्यापार में बाधा डालना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्व
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि होर्मुज में व्यापार और आवागमन की स्वतंत्रता को बनाए रखा जाए। हरिश पी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए और सुरक्षित तथा निर्बाध नौवहन को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।
भारत ने इस संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। हरिश पी ने बताया कि इस टकराव में कई भारतीय नाविकों की जान गई, जो अत्यंत दुखद है। नागरिकों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है।
संयम और कूटनीति की आवश्यकता
भारत ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के संदर्भ में सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। 28 फरवरी 2026 को संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत लगातार सभी देशों से तनाव को न बढ़ाने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की बात कह रहा है।
हरिश पी ने कहा कि सभी देशों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। साथ ही, हर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना आवश्यक है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाला तेल और व्यापारिक सामान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
