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भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मोदी सरकार का महत्वपूर्ण कदम

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए, मोदी सरकार ने एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस समूह का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर संकट का कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। जानें इस समूह की कार्यप्रणाली और इसके महत्व के बारे में।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मोदी सरकार का महत्वपूर्ण कदम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सरकार की सक्रियता

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बना दिया है। इस स्थिति से भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए, मोदी सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वैश्विक परिस्थितियों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट से उत्पन्न मुद्दों पर नजर रखने और त्वरित समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय 'इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप' (अंतर-मंत्रालयी समूह) का गठन किया है।


राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित समूह

इस विशेष समूह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य संबंधित विभागों के प्रमुख मंत्री शामिल हैं। यह समूह मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस की आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।


कच्चे तेल की आपूर्ति पर खतरा

भारत सरकार के लिए यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि देश अपनी आवश्यकताओं का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल और आधे से अधिक प्राकृतिक गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है। हालिया हमलों के बाद इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही प्रभावित हुई है और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है। इस नए समूह का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण भारत में ईंधन की कीमतों में अचानक वृद्धि न हो और किसी भी प्रकार की पैनिक स्थिति उत्पन्न न हो।