भारत की ऊर्जा सुरक्षा: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सरकार की रणनीति
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का प्रभाव
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव में वृद्धि ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका को जन्म दिया है। कतर द्वारा फोर्स मेज्योर की घोषणा और गैस आपूर्ति में रुकावट की खबरों ने भारतीय उपभोक्ताओं में चिंता पैदा कर दी थी। हालांकि, भारत सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से मजबूत है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमारे पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है और सप्लाई चैन को सुरक्षित रखने के लिए 'प्लान-बी' पर काम शुरू हो चुका है, इसलिए जनता को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
सीमित बिक्री की अफवाहें निराधार
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल रही थी कि भारत में पेट्रोल और डीजल की सीमित बिक्री शुरू की जा सकती है। सरकारी सूत्रों ने इन झूठी खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी कोई योजना नहीं है। भारत के पास अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है, और यह भंडार हर दिन रिफिल किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी कमी से बचा जा सके।
कतर का विकल्प और नए बाजार
कतर विश्व की 20 प्रतिशत एलएनजी आवश्यकताओं को पूरा करता है, और भारत अपनी कुल गैस आयात का एक बड़ा हिस्सा कतर से प्राप्त करता है। कतर से संभावित संकट के मद्देनजर, भारत ने नए वैकल्पिक बाजारों की खोज शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भारत को गैस बेचने का प्रस्ताव दिया है, और भारत ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के साथ नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे गैस की कमी का खतरा टल गया है।
सरकार की रणनीति और सप्लाई सुनिश्चित करना
भारत सरकार युद्ध के संभावित खतरों को देखते हुए ऊर्जा स्थिति की नियमित समीक्षा कर रही है। सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें गेल द्वारा फोर्स मेज्योर की घोषणा शामिल है, जिससे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को निर्बाध गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, समुद्र में व्यापारिक जहाजों के बीमा के लिए भारत अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है। कच्चे तेल और एलपीजी की निरंतरता बनाए रखने के लिए भारत प्रमुख तेल उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ भी संपर्क साध रहा है।
