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भारत की ओर बढ़ रहा सुपरटैंकर, गैस संकट में मिलेगी राहत

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण भारत में गैस संकट गहरा गया है। ईरान के साथ तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से एलपीजी गैस की कमी हो गई है। लेकिन अब एक भारतीय सुपरटैंकर, जो 45,000 टन गैस लेकर आ रहा है, राहत की उम्मीद जगाता है। अमेरिका की नाकेबंदी के कारण कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है। जानें इस संकट का समाधान कैसे हो सकता है।
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भारत की ओर बढ़ रहा सुपरटैंकर, गैस संकट में मिलेगी राहत

नई दिल्ली में गैस संकट का असर

नई दिल्ली: खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने भारतीय रसोईयों के बजट को प्रभावित किया है। ईरान के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण देश में एलपीजी गैस की भारी कमी हो गई है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ा है। इस संकट के बीच, महंगाई ने लोगों को चिंतित कर दिया था, लेकिन अब समुद्री मार्ग से एक सकारात्मक खबर आई है, जो करोड़ों भारतीयों के लिए राहत का कारण बन सकती है। ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, गैस संकट को हल करने के लिए एक विशाल भारतीय सुपरटैंकर राहत लेकर देश की ओर बढ़ रहा है।


गैस की खेप होर्मुज के खतरनाक रास्ते से

गैस संकट के बीच 'सर्व शक्ति' सुपरटैंकर समुद्री मार्ग से उत्तर की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह विशाल जहाज लगभग 45,000 टन एलपीजी गैस से भरा हुआ है और इसे शनिवार को लारक और केसम आइलैंड के निकट ट्रैक किया गया। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर ओमान की खाड़ी से होते हुए भारत पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुपरटैंकर ने होर्मुज के कठिन रास्ते को पूरी तरह पार किया है या नहीं, लेकिन इसके भारत की ओर बढ़ने से राहत की उम्मीद जगी है।


अमेरिका की नाकेबंदी में फंसे भारतीय जहाज

13 अप्रैल से अमेरिका द्वारा लागू की गई सख्त नाकेबंदी और ईरान द्वारा होर्मुज का रास्ता बंद करने के कारण समुद्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस नाकेबंदी के कारण भारत के कम से कम 14 जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। हाल ही में, दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज से बाहर निकलने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान की चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान से जुड़े लगभग 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर वैकल्पिक रास्तों से सुरक्षित निकलने में सफल रहे हैं।


वैकल्पिक समुद्री रास्ते

अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश की समुद्री सीमा में जहाजों को नहीं रोक सकती। ऐसे में जहाजों के पास एक खतरनाक लेकिन संभव वैकल्पिक रास्ता है। यदि कोई जहाज ईरान के तटीय क्षेत्र का उपयोग करते हुए चाबहार बंदरगाह तक पहुंच जाए और फिर वहां से दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर ले, तो वह सुरक्षित निकल सकता है। इस मार्ग से जहाज सीधे महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक या केरल के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, एक दूसरा रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर भी जाता है, लेकिन वहां से गुजरने में सुरक्षा का जोखिम बना रहता है।


पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर खतरा

वर्तमान युद्ध की स्थिति में केवल गैस ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में, सरकार ने 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर के दाम में 261 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर पर 1000 रुपये की भारी बढ़ोतरी की थी। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, अब यह 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि बदलते हालातों के मद्देनजर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।