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भारत की कूटनीति से सुरक्षित हुआ होर्मुज जलमार्ग

भारत ने होर्मुज जलमार्ग पर अपनी कूटनीतिक प्रयासों से सुरक्षा स्थापित की है, जिससे ईरान के साथ सहयोग की एक नई मिसाल पेश हुई है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संकट के बीच, भारतीय टैंकरों को सुरक्षित निकासी की अनुमति मिली है। जानें कैसे भारत ने अपनी विदेश नीति के माध्यम से इस चुनौती का सामना किया है और भविष्य में क्या चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
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भारत की कूटनीति से सुरक्षित हुआ होर्मुज जलमार्ग

भारत की कूटनीतिक सफलता


नई दिल्ली: समुद्री व्यापारिक मार्गों पर शक्ति प्रदर्शन की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इसे और भी गंभीर बना दिया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बीच, भारत ने अपनी तटस्थ और मजबूत विदेश नीति के माध्यम से एक सुरक्षित मार्ग स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। पिछले सप्ताह भारतीय टैंकरों को मिले ईरानी सहयोग ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है।


ईरान का ट्रैफिक नियंत्रण

भारतीय टैंकरों ने यात्रा के दौरान ईरानी नौसेना के साथ लगातार रेडियो संपर्क बनाए रखा। ईरानी अधिकारियों ने जहाजों के नाम, झंडे और चालक दल की राष्ट्रीयता की जानकारी मांगी। जब यह पुष्टि हुई कि सभी चालक दल के सदस्य भारतीय हैं, तब उन्हें एक पूर्व-निर्धारित सुरक्षित मार्ग पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि ईरान अपने जलक्षेत्र में कड़ा नियंत्रण रखते हुए भारतीय जहाजों को प्राथमिकता दे रहा है।


ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस क्षेत्र में एक नया 'ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम' लागू किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार पर अपना प्रभाव बनाए रखना है। इस रणनीति के तहत, ईरान केवल अपने मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित निकासी की अनुमति दे रहा है, जबकि अन्य देशों के जहाजों के लिए खतरा बना हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ रही है।


भारत की कूटनीतिक प्रयासों का फल

नई दिल्ली की निरंतर कूटनीतिक कोशिशों के चलते पिछले हफ्ते भारत के दो एलपीजी टैंकरों को होर्मुज पार करने की अनुमति मिली। यह तब हुआ जब ईरान ने कई अन्य देशों के जहाजों को डुबो दिया या उन पर रोक लगा दी। भारत के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरानी नौसेना ने युद्ध की स्थिति में टैंकरों को सुरक्षित निकालने में मदद की है।


वैश्विक ऊर्जा बाजार की चुनौतियाँ

दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी जलमार्ग से गुजरता है। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से कई जहाजों पर हमले हुए हैं, जिससे तेल, गैस और खाना पकाने के ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा, जहाजों के बीमा की लागत में वृद्धि ने माल ढुलाई को महंगा बना दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर वस्तुओं की कमी का खतरा बढ़ गया है।


समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ

ईओएस रिस्क ग्रुप के मार्टिन केली का मानना है कि ईरान केवल जांच-पड़ताल के बाद ही चुनिंदा जहाजों को प्रवेश दे रहा है। खबरों के अनुसार, इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। इन झड़पों में अब तक दो नाविकों की मृत्यु हो चुकी है। भारत ने अपनी सूझबूझ से अपने हितों की रक्षा की है, लेकिन बढ़ते सैन्य जमावड़े के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भविष्य की चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं।