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भारत की खेल नीति में बदलाव की आवश्यकता: बिंद्रा समिति की सिफारिशें

बिंद्रा समिति ने भारत की खेल नीति में सुधार के लिए पेशेवर दृष्टिकोण और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति ने सुझाव दिया है कि खेल प्रशासन को पेशेवर बनाना चाहिए ताकि देश की वास्तविक खेल क्षमता का आकलन किया जा सके। इसके अलावा, नेशनल काउंसिल फॉर स्पोर्ट्स एजुकेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग की स्थापना का भी प्रस्ताव दिया गया है। क्या ये सुझाव भारत के खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे? जानें पूरी रिपोर्ट में।
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भारत की खेल नीति में बदलाव की आवश्यकता: बिंद्रा समिति की सिफारिशें

खेल प्रशासन में पेशेवर दृष्टिकोण की आवश्यकता

भारत की पदक तालिका में सुधार के लिए हमेशा यह सवाल उठता रहा है कि कैसे हम अपनी वर्तमान स्थिति से बाहर निकलें। बिंद्रा समिति ने इसका समाधान पेश किया है, जिसमें खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में सफलता केवल प्रतिभा के आधार पर नहीं मिल सकती। निरंतरता के लिए पेशेवर दृष्टिकोण आवश्यक है। ओलंपिक और अन्य खेल आयोजनों में पदक जीतने के लिए एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जो इस दृष्टिकोण से संचालित हो। यह बिंद्रा समिति की 170 पृष्ठों की रिपोर्ट का सार है, जिसे भारत के पहले व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा के नेतृत्व में तैयार किया गया है। इस समिति का गठन केंद्रीय खेल मंत्रालय ने किया था ताकि भारत के अंतरराष्ट्रीय खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाया जा सके। भारत ने 2036 के ओलंपिक खेलों की मेज़बानी का दावा पेश किया है, जिसके मद्देनजर सरकार ने विशेष तैयारी की आवश्यकता महसूस की है।


हालांकि, यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि भारत अपनी वर्तमान दयनीय स्थिति से कैसे उबर सकता है। बिंद्रा समिति ने खेल प्रशासन को पेशेवर बनाने का सुझाव दिया है, जिससे देश की वास्तविक खेल क्षमता का स्पष्ट खाका तैयार किया जा सके और खिलाड़ियों की प्रगति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही, जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है। समिति ने नेशनल काउंसिल फॉर स्पोर्ट्स एजुकेशन एंड कैपेसिटी बिल्डिंग नामक संस्था की स्थापना का सुझाव दिया है, और खेल प्रशासन से जुड़ी मौजूदा संस्थाओं को पेशेवर बनाने की सिफारिश की है।


समिति का मुख्य उद्देश्य देश में एक मजबूत खेल ढांचे का निर्माण करना है। यह दृष्टिकोण 2016 में नीति आयोग द्वारा बनाई गई टॉप्स योजना से भिन्न है, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें ओलंपिक पदक के लिए तैयार करना था। इस योजना के तहत 2024 तक 50 पदक जीतने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तव में केवल छह पदक मिले, जिनमें से कोई भी स्वर्ण नहीं था। अब बिंद्रा समिति ने दृष्टिकोण में बदलाव का सुझाव दिया है। क्या इसे लागू किया जाएगा? यह कहना मुश्किल है, क्योंकि पेशेवर दृष्टिकोण और जवाबदेही जैसे शब्द हमारे शब्दकोश में अभी तक शामिल नहीं हैं।