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भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट: 157वें स्थान पर पहुंचा

भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट आई है, जो अब 157वें स्थान पर है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में 151वें स्थान से सीधे 6 पायदान नीचे खिसक गया है। इस गिरावट के पीछे पत्रकारों पर बढ़ते कानूनी मामले और सुरक्षा की कमी को जिम्मेदार ठहराया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि 2014 से प्रेस की स्वतंत्रता में कमी आई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट: 157वें स्थान पर पहुंचा

भारत की प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति

नई दिल्ली। भारत, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हाल के वर्षों में, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) में भारत की स्थिति में काफी गिरावट आई है। प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ है कि पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर मिलता है, सरकारी हस्तक्षेप कम होता है और सूचना तक पहुंच सरल होती है। इससे नागरिकों को पारदर्शी और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है, जिससे वे बेहतर सामाजिक और आर्थिक निर्णय ले सकते हैं।


भारत की रैंकिंग में गिरावट

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) पर भारतीय मीडिया के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत अब 180 देशों की सूची में 157वें स्थान पर पहुंच गया है। 2025 में भारत 151वें स्थान पर था, जिससे यह स्पष्ट है कि भारत ने सीधे 6 स्थानों की गिरावट देखी है।


पाकिस्तान और श्रीलंका से पीछे

यह जानकर आश्चर्य होता है कि इस बार पाकिस्तान (153) और श्रीलंका (134) जैसे पड़ोसी देश भी भारत से बेहतर स्थिति में हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण पत्रकारों के खिलाफ बढ़ते कानूनी मामले और सुरक्षा की कमी है। भारत की स्थिति को रिपोर्ट में गंभीर श्रेणी में रखा गया है।


पत्रकारों के लिए खतरनाक माहौल

भारत को पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक माना गया है, जहां हर साल औसतन 2 से 3 पत्रकारों की जान उनके कार्य के कारण जाती है। मानहानि, यूएपीए (UAPA) और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट शटडाउन के मामलों में भी भारत की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।


कांग्रेस अध्यक्ष का बयान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारत की विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि भारत अब 157वें स्थान पर है।


प्रेस की स्वतंत्रता का महत्व

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रेस का कार्य सत्ता के कामकाज की जांच करना और सवाल पूछना है। लोकतंत्र में मीडिया शक्ति और जनता के बीच संतुलन बनाए रखती है।


पत्रकारों की हत्याओं का जिक्र

उन्होंने भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों की हत्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और हरियाणा में पत्रकारों की हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अब सोशल मीडिया पर भी कड़ी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है।