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भारत की भागीदारी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट का समाधान

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के बीच अपने छह जहाजों को सुरक्षित निकाला है। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के युद्ध के चलते यह जल मार्ग बंद हो गया था, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ। ब्रिटेन द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भारत की भागीदारी की पुष्टि हुई है, जिसमें जल मार्ग को फिर से खोलने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, लेबनान में भारतीय शांति सैनिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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भारत की भागीदारी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट का समाधान

भारत की भूमिका और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट


भारत की भागीदारी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट का समाधान


नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध की स्थिति में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक व्यापार में बाधा आई। इस स्थिति ने कई देशों में तेल और गैस की कमी पैदा कर दी।


हालांकि, ईरान ने भारत के जहाजों को इस जल मार्ग से गुजरने की अनुमति दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि होर्मुज के बंद होने से सप्लाई पर असर पड़ा, लेकिन हमारे छह जहाज सुरक्षित निकल गए हैं, जिससे भारत में गैस और तेल की कमी नहीं हुई।


ब्रिटेन में होने वाली बैठक में भारत की भागीदारी

पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए 35 देशों की बैठक बुलाई है। भारत इस बैठक में शामिल होगा, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय ने की है।


विदेश सचिव इस बैठक में भाग लेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि हम ईरान और अन्य देशों के साथ संपर्क में हैं ताकि हमारे जहाजों का आवागमन बिना किसी रुकावट के हो सके। हाल ही में बातचीत के माध्यम से, हमारे छह भारतीय जहाज होर्मुज को सुरक्षित पार करने में सफल रहे हैं।


भारत के लगभग 600 जवान तैनात

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारतीय शांति सैनिकों की सुरक्षा पर भी बयान दिया। उन्होंने बताया कि लेबनान में यूएनआईएफआईएल के तहत लगभग 600 भारतीय जवान तैनात हैं। कुछ सैनिकों को हमलों में जान गंवानी पड़ी थी, लेकिन हमारी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।