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भारत की विकास यात्रा: इक्कीसवीं सदी में बाजार और भीड़ का उदय

इक्कीसवीं सदी के पहले पच्चीस वर्षों में भारत ने कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं, जिसमें बाजार और भीड़ का निर्माण शामिल है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि कैसे नरसिंह राव और मनमोहन सिंह के सुधारों ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया, लेकिन क्या इससे औद्योगिकीकरण हुआ? क्या भारत केवल एक बड़ा बाजार बनकर रह गया है? जानें इस लेख में भारत की विकास यात्रा के विभिन्न पहलुओं के बारे में।
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भारत की विकास यात्रा: इक्कीसवीं सदी में बाजार और भीड़ का उदय

इक्कीसवीं सदी का प्रारंभ

इक्कीसवीं सदी के पहले पच्चीस वर्षों में मानवता ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इस अवधि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का विकास हुआ और अंतरिक्ष में नई खोजों के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण किया गया। लेकिन भारत, जो विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, इस समय में क्या हासिल कर पाया? यहाँ भीड़ और कनेक्टिविटी का ढांचा विकसित हुआ, जिससे बाजार का विस्तार हुआ। ध्यान देने वाली बात यह है कि बीसवीं सदी के अंत में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व में भारत ने एक नई दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने समाजवादी नीतियों से देश को मुक्त किया और उद्यमिता को बढ़ावा दिया।


शिक्षा और सामाजिक बदलाव

राव सरकार ने मानव संसाधनों को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। हालांकि, वीपी सिंह के समय में मंडल-मस्जिद के मुद्दों ने समाज में विभाजन पैदा किया। इस दौरान युवा पीढ़ी या तो आईटी क्षेत्र में काम करने लगी या सरकारी नौकरियों की तलाश में भटकने लगी। अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी के सर्व शिक्षा अभियान ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मोड़ दिया, लेकिन इससे अर्धसाक्षरता की समस्या भी बढ़ी।


इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

सरकारी स्कूलों की स्थिति बिगड़ गई और निजी शिक्षा ने असमानता को जन्म दिया। परिणामस्वरूप, युवा पीढ़ी कुशलता के नाम पर बेकार हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थिति को समझते हुए कहा कि दफ्तर के बाहर पकौड़े बेचना भी रोजगार है। नरसिंह राव और मनमोहन सिंह ने वैश्विक स्तर पर उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया।


बाजार का उदय

हालांकि, पिछले तीन वर्षों में अंबानी-रिलायंस ने यूक्रेन संकट के दौरान सस्ते कच्चे तेल का आयात कर अरबों का मुनाफा कमाया। भारत ने 1990 से 2000 के बीच अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया, लेकिन क्या इससे औद्योगिकीकरण हुआ? भारत में कारखाने नहीं खुले और न ही उत्पादकता में वृद्धि हुई। इसके बजाय, भारत एक बड़ा बाजार बन गया, जहाँ चीन के सामान की ढुलाई आसान हो गई।


वर्तमान स्थिति

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है, लेकिन औद्योगिकीकरण नहीं हुआ। बाजार का विस्तार हुआ है, लेकिन यह सस्ता और स्वदेशी नहीं है। आज, भारतीय उपभोक्ता विदेशी उत्पादों के प्रति आकर्षित हो गए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि भारत की युवा पीढ़ी विदेशी ब्रांडों की ओर बढ़ रही है।


निष्कर्ष

इक्कीसवीं सदी के पिछले पच्चीस वर्षों में भारत ने बाजार और भीड़ का निर्माण किया है, लेकिन यह विकास का सही अर्थ नहीं है। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि वास्तविक विकास तब होता है जब हम आत्मनिर्भरता और उत्पादकता की ओर बढ़ते हैं।