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भारत की विदेश नीति: पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते रिश्ते

भारत की विदेश नीति का आधार शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व रहा है, लेकिन वर्तमान में पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते बिगड़ते जा रहे हैं। नेपाल और बांग्लादेश में भारत के प्रति नफरत बढ़ रही है, जबकि चीन का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है। इस लेख में हम इन चुनौतियों का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि भारत की विदेश नीति का भविष्य क्या हो सकता है।
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भारत की विदेश नीति: पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते रिश्ते

भारत की विदेश नीति की चुनौतियाँ

भारत की विदेश नीति का आधार शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सिद्धांत रहा है। हालाँकि, वर्तमान में दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ कोई भी देश भारत की बात सुनने को तैयार नहीं है। नेपाल इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ भारत के दो सौ और पांच सौ रुपए के नोटों को स्वीकार करने की अनुमति मुश्किल से मिली है। नेपाल ने एक दशक से अधिक समय से भारत की एक सौ रुपए से अधिक की मुद्रा को स्वीकार करना बंद कर दिया था। अब भी, यह सीमा निर्धारित की गई है कि कोई भी भारतीय या नेपाली नागरिक 25,000 रुपए से अधिक के दो सौ या पांच सौ रुपए के नोट नहीं रख सकता।


नेपाल के साथ बिगड़ते रिश्ते

नेपाल, जो कभी दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र माना जाता था, अब भारत से दूर होता जा रहा है। काठमांडू में भगवान शिव के पशुपतिनाथ मंदिर के कारण लोग नेपाल आते थे, लेकिन अब नेपाल के लोग भारत के प्रति अविश्वास का अनुभव कर रहे हैं। भारत के नेताओं के बयानों और नीतियों ने नेपाल में नाराजगी पैदा की है। हिंदी फिल्मों का बहिष्कार और भारतीय मुद्रा का तिरस्कार बढ़ रहा है।


बांग्लादेश में भारत के प्रति नफरत

भारत ने बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन अब वहाँ भारत और हिंदुओं के प्रति नफरत बढ़ रही है। हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं और उन्हें देश छोड़ने या धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है। नेपाल में चीन और पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे भारत की स्थिति कमजोर हो रही है।


अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंध

भारत के अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। चीन के साथ सीमा विवाद और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। भारत आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर होता जा रहा है, जबकि चीन की नजरें भारत के अरुणाचल प्रदेश पर हैं। श्रीलंका में भारत ने मदद की, लेकिन वहाँ का झुकाव चीन की ओर है। म्यांमार की सैनिक तानाशाही भी चीन के प्रभाव में है।


भारत की विदेश नीति का भविष्य

भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में निरंतर तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारत की विदेश नीति का अमृतकाल वास्तव में क्या है।