भारत की सीमाओं को मजबूत करने के लिए सुरंगों का निर्माण
भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाने की दिशा में कदम
नई दिल्ली: भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। हिमालय से लेकर पूर्वोत्तर तक कई रणनीतिक सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जो न केवल सेना को हर मौसम में पहुंच प्रदान करेंगी, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में विकास को भी बढ़ावा देंगी। सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, छह महत्वपूर्ण सुरंग परियोजनाओं की डीपीआर को फास्ट ट्रैक पर रखा गया है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण लद्दाख की शिंकु ला सुरंग है, जो दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अन्य राज्यों में भी इस प्रकार की परियोजनाएं तेजी से प्रगति कर रही हैं।
लद्दाख में शिंकु ला: दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग
15,800 फीट की ऊंचाई पर बनने वाली 4.1 किमी लंबी शिंकु ला सुरंग लद्दाख को निम्मू-पदम-दारचा मार्ग से एक नया ऑल-वेदर रूट प्रदान करेगी। यह सुरंग सीमा से सुरक्षित दूरी पर स्थित है, जिससे इसका सामरिक महत्व बढ़ जाता है। प्री-कंस्ट्रक्शन कार्य इस वर्ष मध्य तक शुरू होने की उम्मीद है। सुरंग के पूरा होने पर मनाली-लेह की दूरी 60 किमी कम हो जाएगी और जांस्कर घाटी के 15 गांवों को साल भर कनेक्टिविटी मिलेगी।
पूर्वोत्तर में तवांग-मणिपुर सुरंगें गेम-चेंजर
अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में स्मल्दर सुरंग भारी तोपखाने और मिसाइल सिस्टम को सैटेलाइट से बचाकर एलएसी तक पहुंचाने में मदद करेगी। इस रूट का फाइनलाइजेशन हो चुका है और 2027 तक काम शुरू होने की योजना है। मणिपुर की मोरहे-थुइबुल सुरंग दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापार और सैन्य आवाजाही को तेज करेगी। तवांग में 2-3 छोटी सुरंगों की डीपीआर भी तैयार की जा रही है, जो सेना की गति को बढ़ाएंगी।
जम्मू-कश्मीर में सिंथन टॉप ट्विन सुरंग
अनंतनाग को किश्तवाड़ से जोड़ने वाली 10-12 किमी लंबी ट्विन सुरंग सिंथन टॉप की डीपीआर अंतिम चरण में है। यह सुरंग सर्दियों में बर्फबारी के कारण बंद होने वाले दर्रे को साल भर खुला रखेगी। भू-तकनीकी सर्वेक्षण पूरा होने वाला है, जिससे घाटी और जम्मू के बीच वैकल्पिक सुरक्षित संपर्क स्थापित होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी।
महाराष्ट्र-केरल में विकास केंद्रित सुरंगें
महाराष्ट्र की खमशेत-कासरघाट सुरंग पश्चिमी घाट में ट्रैफिक को सुचारू बनाएगी, जिससे मुंबई-पुणे और मुंबई-गोवा रूट तेज होंगे। वहीं, केरल में वायनाड-मलप्पुरम के बीच इको-सेंसिटिव सुरंग हाथियों के गलियारों को सुरक्षित रखते हुए कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। ये परियोजनाएं सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी और पर्यावरण का भी ध्यान रखेंगी।
रणनीतिक सुरंगों से सीमाएं मजबूत, विकास तेज
सरकार केवल हिमालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सुरंगों का जाल बिछा रही है। ये परियोजनाएं चीन-पाक सीमाओं पर सैन्य ताकत को बढ़ाएंगी और मैदानी इलाकों में जीवन को आसान बनाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि फास्ट ट्रैक मोड में काम चल रहा है, जिससे न केवल रक्षा मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
