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भारत के पड़ोस में युद्ध का संकट: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खूनी संघर्ष

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हाल ही में शुरू हुए खूनी संघर्ष ने दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ा दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री के अनुसार, उनके देश ने अफगानिस्तान के 41 ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें 350 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे गए हैं। रक्षा मंत्री ने खुली जंग का ऐलान किया है, जबकि तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सैनिकों को नुकसान पहुँचाने का दावा किया है। इस संघर्ष के पीछे की जटिलताओं और ऐतिहासिक विवादों को समझने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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भारत के पड़ोस में युद्ध का संकट: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खूनी संघर्ष

तनावपूर्ण हालात का सामना

नई दिल्ली: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, भारत के पड़ोसी देशों में भी स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले चार दिनों से जारी खूनी झड़पों ने दक्षिण एशिया में चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने दावा किया है कि उनके देश ने अफगानिस्तान के 41 ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें 350 से अधिक तालिबान लड़ाकों की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही, 130 तालिबानी चौकियों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है और लगभग 530 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।


खुली जंग का ऐलान

रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले ही यह घोषणा की थी कि अफगानिस्तान के साथ युद्ध शुरू हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान ने पाकिस्तानी सीमा में घुसपैठ कर हमले किए हैं, जिसका जवाब दिया जा रहा है। इस संदर्भ में, पाकिस्तान ने काबुल और कंधार जैसे महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया है। तनाव को कम करने के लिए तुर्की और कतर जैसे देशों ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे।


तालिबान का पलटवार

पाकिस्तानी सैनिकों पर हमले का दावा

जहां पाकिस्तान अपनी जीत का दावा कर रहा है, वहीं तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है। इसके अलावा, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के दो बड़े सैन्य ठिकानों और 19 सैन्य पोस्ट पर कब्जा करने का भी दावा किया है। हालांकि, पाकिस्तान की सेना और सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है।


पुराना विवाद

डूरंड लाइन का मुद्दा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह दुश्मनी नई नहीं है। 2021 में नाटो सेनाओं की वापसी के बाद पाकिस्तान को लगा था कि तालिबान की सत्ता आने पर वह अफगानिस्तान को नियंत्रित कर सकेगा। लेकिन तालिबान ने अपनी भूमि का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए करने से इनकार कर दिया। सबसे बड़ा विवाद खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और डूरंड लाइन को लेकर है, जिसे तालिबान मान्यता नहीं देता। उनका मानना है कि खैबर पख्तूनख्वा की पश्तून आबादी के साथ उनका गहरा संबंध है, इसलिए वहां मुक्त आवाजाही होनी चाहिए। यही वर्चस्व की लड़ाई आज एक भयंकर युद्ध का रूप ले चुकी है।